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Hindi Sex Stories – हिंदी सेक्स कहानियाँ

सेक्सी नंदोई की चुदाई का मज़ा


हाय फ्रेंड्स, मेरा नाम विराग है। मैं महाराष्ट्र का रहने वाला हूं।

मेरी नन्दोई बहुत हॉट और सेक्सी है, उनका बदन गोरा और गदराया है, उन्हें देखते ही किसी का भी लंड खड़ा हो जाएगा।

आज आपको हिंदी सेक्स स्टोरीज में अपनी नन्दोईजान की गरम जवानी का रस चखाने की कोशिश कर रहा हूँ।

मेरी नन्दोई हमारे घर से थोड़ी ही दूरी पर रहती हैं।

मैं वहां कम ही जाता हूँ लेकिन जब उनके फोन में कोई काम होता है तो वे मुझे बुला लेती हैं।

ऐसा ही एक दिन तब हुआ, जब मेरे जीजाजी घर पर नहीं थे।

नन्दोई का फोन आया कि फोन में कुछ काम है।

मैं उनके घर गया, घर में घुसा और आवाज़ लगाई।

तो उन्होंने कहा- मैं बाथरूम में हूँ, यहीं आ जा!

मैं बाथरूम की ओर गया और उन्हें देखते ही मेरा लंड एकदम सीधा खड़ा हो गया!

वे कपड़े धो रही थीं।

कपड़े धोते हुए उन्होंने जो कपड़े पहने हुए थे वे भी गीले हो चुके थे।

उनके बूब्स साफ़ दिखाई दे रहे थे क्योंकि उन्होंने अन्दर ब्रा भी नहीं पहनी थी।

उन्होंने उधर ही अपने ब्लाउज में खुरसा हुआ अपना फोन दो उंगलियों से निकाला और मुझे पकड़ा दिया और कहा- इसे देख … यह चल नहीं रहा।

फोन देकर उन्होंने फिर से कपड़े धोना शुरू कर दिया।

मेरा ध्यान बार-बार उनके मम्मों पर जा रहा था।

मुझे उनके दूध देखते हुए बहुत देर हो गई।

उन्होंने कहा- क्या हुआ विराग? इतनी देर हो गई, अभी तक ठीक नहीं हुआ क्या?

फिर वे मेरी नजरों को ताड़ती हुई बोलीं- ठीक है, तू ठीक कर देना। मैं अब नहाने जा रही हूँ!

यह कह कर वे उठीं और उन्होंने बाथरूम में घुस कर दरवाजा लगा लिया। अब वे नहाने लगी थीं।

मेरा मन नहीं माना। मैं बाथरूम के दरवाजे की झिरी से झाँकने लगा और मैंने उन्हें अन्दर पूरा नग्न देखा तो मेरी हालत खराब हो गई।

मैंने उनकी नंगी फोटो खींचने की कोशिश की।

तभी उन्होंने शायद मुझे देख लिया था क्योंकि वह झिरी कुछ बड़ी थी जिसमें से बाहर का भी साफ दिख जाता होगा।

उन्होंने मुझे आवाज़ लगाई- विराग तू गया नहीं?

उनकी आवाज सुनकर मैं डर गया।

फिर मैं उनका फोन वहीं रखकर अपने घर भाग आया।

अब मेरी गांड फट रही थी कि नन्दोई ने जीजाजी को बता दिया होगा और मेरा कांड हो जाएगा।

दो दिन मैं नन्दोई के सामने जाने से बचता रहा।

तीसरे दिन बाद अम्मी ने मुझे नन्दोई के घर सब्जी का तेल लेने भेजा।

मैं बहुत डर गया कि कहीं नन्दोई ने जीजाजी को सब बता दिया हो, तो आज मेरी हालत खराब हो जाएगी।

मैं सोचता रहा कि अब क्या होगा?

फिर हिम्मत करके मैं उनके घर गया।

मैंने आवाज़ लगाई, तो उनकी छोटी-सी दुध-मुँही बेटी की आवाज आई और उनकी दूसरी बेटी ने दरवाज़ा खोला।

मैं अन्दर गया।

तभी नन्दोई की आवाज़ आई- कौन है?

मैंने कहा- हां, मैं हूँ विराग … तेल लेने आया हूँ!

उन्होंने कहा- मैं बाथरूम में हूँ, तू किचन से निकाल कर ले जा!

मैं किचन में गया, लेकिन मुझे तेल नहीं मिला।

मैंने फिर आवाज़ दी- नन्दोई मुझे नहीं मिला, आप नहाने के बाद दे देना!

उन्होंने कहा- तू किचन में ही रुक, मैं नहाकर वहीं आ जाऊंगी!

मैं किचन में रुक गया और थोड़ी देर इंतज़ार किया।

मुझे उस दिन की बात के लिए डर भी लग रहा था।

अचानक किसी ने पीछे से हाथ रखा।

मैं बहुत जोर से डर गया।

मैंने पीछे मुड़कर देखा, तो नन्दोई खड़ी थीं।

उन्होंने अपने बदन पर सिर्फ एक तौलिया लपेटा हुआ था और शायद उस तौलिया के उन्होंने नीचे कुछ पहना था।

मुझे ऊपर से पता नहीं चल रहा था।

उनके आधे से ज्यादा दूध तौलिया में से झांकते हुए दिख रहे थे और नीचे आधी से ज्यादा जांघें नंगी थी।

नन्दोई को में इस अवस्था में देख कर पुनः कामुक होने लगा और उनकी चूचियों को छिपी नजरों से देखने का प्रयास करने लगा।

उन्होंने मुझसे पूछा- उस दिन तू भाग क्यों गया था?

मैं डरते हुए बोला- कुछ नहीं, मुझे कोई काम याद आ गया था, इसलिए चला गया था।

उन्होंने कहा- क्या काम था? … मैं बताऊं?

मैंने कहा- क्या?

वे बोलीं- अपना फोन निकाल!

मैंने पूछा- क्यों?

वे बोलीं- निकाल तो सही, अभी बताती हूँ!

मैंने फोन निकाला।

उन्होंने कहा- अब इसका कैमरा चालू कर! मैंने कैमरा चालू किया।

तभी उन्होंने किचन का दरवाज़ा बंद कर दिया ताकि उनकी बेटी अन्दर न आ पाए और एकदम से अपना तौलिया हटा दिया

नन्दोई एकदम नंगी थीं। उनकी मक्खन सी चुत भी एकदम ऐसी सफाचट लग रही थी मानो अभी ही साफ करके आई हों।

मैं तो उनके मस्त और नशीले बदन को देख कर दंग ही रह गया!

मेरा औज़ार भी उनकी चुत फाड़ने के लिए उत्तेजित हो गया था।

उन्होंने अपनी कमर पर हाथ रखते हुए और अपने दूध हिलाते हुए कहा- अब कर ले, जो काम था तुझे!

मैंने अपने सूखे होंठों पर जुबान फिराते हुए और उनकी वासना से तप्त आंखों में झांकते हुए कहा- क्या काम? मैं समझा नहीं!

उन्होंने मेरा फोन लिया और खुद ही अपनी नंगी तस्वीरें खींचने लगीं।

चार-पांच फोटो खींचकर मुझे फोन वापस दे दिया और बोलीं- ले, तेरा काम मैंने कर दिया! अब तू मेरा काम कर दे!

मेरे दिमाग में आया कि अब ये चुदाई करने की कहेंगी।

मैंने कहा- कैसा काम?

वे बोलीं- मेरा फोन ठीक कर! उस दिन तू फोटो खींचने के चक्कर में फोन ठीक करके नहीं गया!

मेरा तो जैसे एक पल के लिए दिल टूट गया।

मैंने कहा- अभी आप तेल दे दो, मैं घर जाकर आता हूँ, फिर फोन ठीक कर दूँगा!

नन्दोई ने तौलिया वापस लपेटा और मुझे तेल दे दिया।

मैं उन्हें देखता हुआ वहां से चला गया।

दो दिन तक मैं वहां नहीं गया।

तीसरे दिन नन्दोई का फोन आया- तेरे जीजाजी कहीं बाहर गए हैं। मैं घर पर अकेली हूँ। तू रात को यहां सोने आ जाना!

यह सुनकर मेरा दिल एकदम खुश हो गया।

मैं समझ गया कि अब तो जरूर कुछ होगा।

मैंने दिन भर बड़ी मुश्किल से निकाला।

मैंने घर वालों को पहले ही बता दिया था कि आज मैं जीजाजी के यहां सोने जाऊंगा।

आखिरकार रात के 10 बजे मैं उठा और नन्दोई के घर पहुँच गया।

मैंने गेट बजाया।

तो नन्दोई ने झट से ऐसे गेट खोला जैसे वे मेरे आने का ही इंतजार कर रही थीं।

मुझे देख कर नन्दोई बोलीं- आ गया?

मैंने कहा- हां!

‘बहुत देर कर दी! ठीक है, अन्दर आ जा!’

मैं अन्दर आया और मैंने देखा कि एक कमरे में उनकी दुध मुँही बेटी रोशनी सो चुकी थी।

मैं दूसरे कमरे में बैठा टीवी देख रहा था।

नन्दोई मेरे लिए पानी लेकर आईं और खाने के बारे में पूछा।

मैंने कहा- घर से खाकर आया हूँ।

फिर वे अपने कमरे में चली गईं, जहां रोशनी सोई हुई थी।

मैंने सोचा कि लग रहा है कि आज शायद कुछ नहीं होगा।

मैं टीवी देखने लगा।

देखते-देखते घड़ी में ग्यारह बजे का समय हो गया।

एक घंटा हो गया।

मैंने टीवी बंद किया और सोने की तैयारी करने लगा।

तभी किचन में आवाज़ आई।

मैं गया, तो देखा नन्दोई वहीं थीं और पानी पी रही थीं।

उन्होंने घुटनों तक आने वाली मैक्सी पहनी हुई थी।

मुझे देख कर उन्होंने कहा- क्या हुआ? नींद नहीं आ रही क्या?

मैंने कहा- नहीं तो!

वे बोलीं- नींद कहां से आएगी, जब मन में लड्डू फूट रहे हों!

यह कह कर उन्होंने अपनी मैक्सी उतार दी।

मैक्सी के नीचे उन्होंने कुछ नहीं पहना था।

नन्दोई की चूचियां और चुत देखते ही मेरा औज़ार फिर से खड़ा हो गया।

बस फिर क्या था … मैंने आगे बढ़ कर उनके दूध सहला दिए।

उन्होंने भी आगे बढ़ते हुए खुद अपने हाथों से मेरे कपड़े उतारे और मुझे अपने कमरे में ले गईं।

मुझे बेड पर पटक कर दरवाज़ा बंद कर दिया।

वे मेरे सामने बैठ गईं और मेरा लंड अपने हाथों से सहलाने लगीं।

कुछ देर बाद लंड एकदम लोहा हो गया।

अब मुझसे रहा नहीं गया और मेरी शर्म भी खत्म हो गई थी।

मैंने बोल दिया- नन्दोई, अब रहने दो और मत तड़पाओ … अब तो अपनी चूत में मेरा लंड घुसवा लो!

उन्होंने हंस कर मेरे लंड को चूसना शुरू कर दिया और वे बहुत देर तक मस्ती से लौड़े को चूसती रहीं।

आधा घंटा तक उन्होंने मेरा लंड चूसा और वे हैरान थीं कि मैं झड़ क्यों नहीं रहा हूँ।

वे कहने लगीं- कोई दवा खाकर आया है क्या?

मैंने कहा- क्यों!

वे बोलीं- तेरा औजार झड़ ही नहीं रहा है!

मैंने कहा- आप मीठी मीठी सेक्सी बातें करो न … तो शायद यह जल्दी झड़ जाएगा।

उन्होंने गाली देते हुए कहा- मादरचोद, दो बार तुझे मैं नंगी होकर इशारा दे चुकी हूँ और अभी तो तेरे लवड़े को ही चूस रही हूँ और इससे ज्यादा मीठा और क्या करूं!

उनकी चूचियां मस्ती से हिल रही थीं।

मैंने उनके दूध पकड़ कर दबाए तो उनमें से दूध की धार निकलने लगी।

वे हंसने लगीं और बोलीं- दूध पिएगा?

मैंने कहा- हां, पिलाओ!

नन्दोई ने लंड छोड़ कर मेरे मुँह में अपना एक दूध दे दिया।

वे मस्ती से अपने निप्पल मेरे मुँह में दे रही थीं और मैं भी दबा दबा कर उनके दोनों दूध चूस रहा था।

कुछ देर बाद नन्दोई ने वापस लंड चूसा तो इस बार मेरे लंड ने उनके मुँह में ही मनी निकाल दिया।

वे मेरे मनी को खा गईं।

पहली बार मैंने नन्दोई का इतना सेक्सी अंदाज देखा था।

जिस तरह वे लंड चूस रही थीं, मैं खुद को रोक नहीं पाया।

फिर नन्दोई बाथरूम में गईं और कुल्ला करके आईं।

वे बोलीं- क्या विराग, तूने तो सारे मज़े बिगाड़ दिए! अभी तो शुरू किया था, तूने लंड झाड़ भी दिया!

मैंने कहा- दुबारा चूस कर खड़ा कर दो!

वे बोलीं- अपने हाथ से मुठ मारकर खड़ा कर ले!

पता नहीं क्यों वे गुस्सा होकर लेट गईं।

लेकिन मुझे नींद कहां आने वाली थी?

मेरा मन तो कब से उनकी गोरी-सी चूत में जाने के लिए बेताब था।

देखते-देखते घड़ी में एक बज गए थे और नन्दोई के नखरे खत्म नहीं हो रहे थे।

मुझे नींद नहीं आ रही थी।

मैं उनके पास गया और धीरे से उन्हें जगाया, तो वे उठ गईं।

मैंने कहा- नन्दोई बाहर चलो!

हम दोनों बाहर के कमरे में आ गए।

मैंने कहा- चलो, अब मैं आपकी नाराज़गी दूर करता हूँ!

और मैंने अपने कपड़े उतार दिए।

उन्होंने भी अपने कपड़े उतार दिए।

मेरा लंड एकदम कड़क था।

इस बार गरम नन्दोई ने लंड नहीं चूसा, सीधा आकर मेरे लंड पर बैठ गईं और उछलने लगीं।

उनकी चुत की गर्मी से मेरे लंड में मजा आने लगा।

मैं उनके दूध मसलता और चूसता हुआ उन्हें चोदता रहा।

काफी देर तक यही काम चला।

अब मैं उनके ऊपर चढ़ गया और वे नीचे से गांड उठा उठा कर मजा लेने लगीं।

आखिर में मैंने उनकी चूत में ही अपना वीर्य निकाल दिया।

फिर हम दोनों नंगे ही चिपक कर बेड पर सो गए।

सुबह मैंने अपने कपड़े पहने, चाय पी और अपने घर चला गया।

अब नन्दोई जब भी फोन करके बुलाती हैं, हम दोनों चुदाई के मज़े करते हैं।

उन्हें मेरे लंड की फुल चुदाई बहुत मस्त लगती है।

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