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Hindi Sex Stories – हिंदी सेक्स कहानियाँ

ससुराल का द्वितीय भाग


प्रेषक : अमित

पिछले भाग की कुछ अंतिम पंक्तियां : लल्लू लाल कहां रुकने वाले थे, 5 मिनट बाद उन्होंने अपना पूरा चिकना लंड बहू की चूत में पेल ही दिया, अब सिर्फ आंड बाहर रह गए। जैसे ही सुषमा का दर्द थोड़ा कम हुआ और वो सामान्य हुई, उन्होंने लंड को अंदर-बाहर करना शुरू कर दिया। लल्लू लाल बहू की चूत के खून से रंगा लंड अंदर-बाहर करते रहे, सुषमा की चीखें सुनाई देती रहीं।

बेटा तू बापू की गांड चाट ! मैं आंड चाटती हूं, नहीं तो ये बहू को चोद चोद कर मार डालेंगे ! रुक्मणि बोली।

सुषमा ने देखा कि उसका पति उसके ससुर की गांड चाट रहा था और सास ससुर के मोटे काले अंडकोष चाट रही थी। लल्लू लाल जी उत्तेजना के शिखर पर थे- बहू, भर दूं तुम्हारी कंवारी चूत अपने ताकतवर वीर्य से? उन्होंने पूछा।

सुषमा ने कुछ बोलना चाहा ही था कि वो गर्र-गर्र करते हुए झड़ गए।

ओह ! ओह ! आपने तो कोई आधा कप पानी बहू की चूत में छोड़ दिया है, बच्चा होकर रहेगा ! रुक्मणि बोली।

अब आगे :

ससुर जी ऊपर से हट कर बिस्तर के कोने पर बैठ गए और सुषमा को सहलाने लगे। उधर सुरेश नीचे जाकर रुक्मणि की चूत चाट रहा था।

चाट मेरे लाल, चाट ! मेरे बेटे तेरी जीभ तो लंड से भी ज्यादा मज़ा देती है ! रुक्मणि बोल रही थी। उधर लल्लू लाल जी भी नीचे पहुंच गए, उन्होंने सुरेश की गांड में तेल लगा कर उसको उंगली से चोदना शुरू कर दिया।

हां बापू ! फाड़ो मेरी गांड ! सुरेश गांड नचाते हुए बोल रहा था।

ससुर ने सुषमा को नीचे खींचा और उसका मुंह से अपने लंड को अड़ा दिया- इसको चूस चूस कर बड़ा कर बहूरानी ! ताकि मैं तेरे पति की सेवा कर सकूं ! उन्होंने कहा।

सुषमा ने उनके मोटे काले लंड को कस के पकड़ा और जीभ फेरने लगी। धीरे धीरे लल्लू लाल जी का सुपारा चीकू जितना बड़ा हो गया और लंड एकदम हथोड़े जैसा !

ससुरजी ने बहू को धन्यवाद दिया और वापस से सुरेश की गांड पर अपना हथियार तान दिया। किसी मंजे हुए खिलाड़ी की तरह सुरेश ने गांड को हिलाया और एक ही झटके में लल्लू लाल जी का आधा लंड उसकी गांड में चला गया।

सुरेश जोर से चीखा- मर गया बापू ! अभी पूरा कहां मरा है? अभी तो आधा ही मारा है ! लल्लू लाल जी बोले और पूरा लंड पेल दिया। सुषमा सोचने लगी कि सुरेश की गांड क्या उतनी बड़ी है?

उधर सुरेश अपनी मां की चूत चाटे जा रहा था।

रुक्मणि उछल रही थी- बेटा। मैं झड़ने वाली हूं, पूरी जीभ डाल दे अपनी मां के भोसड़े में ! वो बोली।

और दो मिनट में हांफते हुए अपना पानी छोड़ दिया। उधर लल्लू लाल जी की रफ्तार बढ़ गई थी।

रुक्मणि पीछे आ गई, मेरे बेटे की गांड फाड़ दोगे क्या ? अब रहम करो ! वो बोली और सुरेश के नीचे लेट गई। सुषमा ने देखा कि रुक्मणि सुरेश की लुल्ली को चूस रही थी और अपने हाथों से ससुरजी के बड़े बड़े अंडकोषों को मसल रही थी।

अब अपने बेटे की गांड अपने पानी से भर दो ! रुक्मणि बोली। यह सुनते ही लल्लू लाल जी तेज हो गए और बोले- हां जान। ये ले तेरे बेटे की गांड में अपना पानी डालता हूं ! कहकर वो झड़ गए। सुषमा थक कर सो गई।

सुषमा को पता चल गया था कि उसके ससुर उसकी सास को तो मां नही बना सके मगर ये कसर अब उसके साथ जरूर पूरी करेंगे।

सुबह जब उसकी आंख खुली तो ससुर और पति दोनों काम पर जा चुके थे मगर सास नहीं गई थी।

रुक्मणि बोली- आज तेरी सेवा करूंगी बहू !

खून से भरी चादर धुल गई थी और रुक्मणि ने सुषमा से कहा- नहाने से पहले मैं तेरी तेल मालिश करूंगी।

रुक्मणि ने सुषमा के पूरे कपड़े खोल दिए और उसके पूरे बदन पर मालिश करने लगी। फिर उसने रेजर लेकर सुषमा की झांट साफ की और बोली- बेटा यहाँ हमेशा सफाई रखनी चाहिए। मैं, तुम्हारे ससुर और सुरेश के झांट भी साफ करती हूं हमेशा !

सफाई के बाद रुक्मणि ने तेल लेकर उसकी चूत पेर लगाया और उंगली से सुषमा की चूत चोदने लगी।

बेटी, इससे तेरा छेद बड़ा हो जाएगा ताकि आज रात तू आसानी से ससुर का लंड ले सके ! वो बोली।

उंगली की चुदाई में सुषमा को बहुत मज़ा आ रहा था और वो सास के साथ साथ अपनी गांड हिलाने लगी। कोई पांच मिनट बाद सास की तीन उंगलियां अंदर थी और सुषमा झड़ गई। उसे पहली बार चरमसुख मिला था। सास उसको रात के लिए तैयार कर रही थी।

रात होते ही सुषमा वापस ससुर के कमरे में गई। ससुरजी वैसे ही नंगे लेटे हुए थे, पास जाते ही उन्होंने सुषमा को अपने पास खींच लिया और चूमने लगे। एक ही पल में उन्होंने सुषमा को नंगा कर दिया और उसकी चूत चाटने लगे। कोई पांच मिनट बाद सुषमा अपने ससुर की जीभ पर झड़ गई। उधर सुरेश अपने पिता का लंड कुत्तों की तरह चाट रहा था। सुषमा के झड़ते ही लल्लू लाल जी ने अपना लंड उसकी चूत से भिड़ाया और एक ही शॉट में भीतर पेल दिया। सुषमा चीखी मगर उसे आनंद भी आया। अब ससुरजी धीरे-धीरे लंड अंदर-बाहर करने लगे। उसको अच्छा लग रहा था, उसने अपने हाथों से ससुरजी की गांड कस कर पकड़ ली और उन्हें अपने ऊपर दबाने लगी।

लल्लू लाल जी ने धक्कों की रफ्तार बढ़ा दी और जोर-जोर से सुषमा को चोदने लगे। उधर सुरेश अपने पिताजी के अमरूद समान आंडों को तेल लगा कर मसल रहा था और कह रहा था- बापू इन आंडों का पूरा रस डाल दो इस रांड की चूत में, ताकि इसको आपका बच्चा हो !

हां बेटा, पूरा वीर्य खाली कर दूंगा ! लल्लू लाल जी बोले और एक चीख के साथ वो झड़ गए। सुषमा का भी पानी निकल गया। सुषमा को पहली बार चुदाई का मज़ा आया था।

अगले दिन रुक्मणि बोली- बेटी, हालाँकि तेरे ससुर का लंड शानदार है लेकिन तू मुझे कहेगी कि मैंने तुझे जवान लंड का मज़ा नहीं दिया, इसलिए आज एक जवान लंड के लिए तैयार रहना ! वो आँख मारते हुए बोली।

सुषमा कुछ समझती उससे पहले यासीन वहाँ आ गया। यह वही लड़का था जिसको उसने अपने पति सुरेश की गांड मारते हुए देखा था। सुरेश उसको कमरे में लाया और अंदर से बंद कर दिया। सुरेश ने एक मिनट में सुषमा के कपड़े उतार दिये और यासीन को नंगा कर उसका लंड चूसने लगा। सुषमा ने देखा कि यासीन का लंड भी बहुत बड़ा था हालाँकि वो उसके ससुर के लंड से छोटा था मगर मोटाई अच्छी थी और ससुर की तरह उसके लंड के आगे चमड़ी नहीं थी।

यासीन तुरंत सुषमा के पास आया और उसके 38 इंच के स्तन दबाने लगा। उधर सुरेश नीचे सुषमा की चूत और यासीन का लंड चाट रहा था। यासीन कामोत्तेजना में पागल हो रहा था और उसने झटके से अपने लंड का गुलाबी सुपारा सुषमा की चूत में पेल दिया। सुषमा के मुंह से हल्की सी चीख निकली। चीख सुनते ही यासीन ने पूरा सात इंच का लंड अंदर घुसा दिया सुषमा की सांस ऊपर चढ़ गई। सुरेश यासीन की गांड चाट रहा था और यासीन गालियां बक रहा था- भेन की लौड़ी, आज तेरे हिजड़े पति के सामने तेरी चूत फाड़ दूंगा।

सुषमा को उसके मज़बूत झटको से आनंद आ रहा था। यासीन ज्यादा देर तक चल नहीं पाया, दो मिनट में उसका फव्वारा सुषमा की चूत में छुट गया। मगर सुरेश कम नहीं था, उसने यासीन का गीला लंड बाहर निकाला और उसको चाटने और चूसने लगा। दो मिनट में यासीन फिर तैयार था, उसने सुषमा की गीली चूत में ही अपना लौड़ा पेल दिया।

चोदो मुझे जोर से ! सुषमा बोली।

इस बार कोई 5 मिनट चोदने के बाद यासीन और सुषमा एक साथ झड़ गए। यासीन के जाने के बाद रुक्मणि अंदर आई और बोली- मैने ही इस लड़के को सुरेश की गांड मारने की आदत डलवाई है। इसका चाचा और बाप दोनों मुझे चोद चुके हैं, रात को उन दोनों को बुलाऊंगी ! यह कह कर वो चली गई।

रात में सुषमा ने देखा कि दो बूढ़े घर आए, दोनो साठ के आसपास होंगे। एक की दाढ़ी थी। उनकी उमर देख कर लग नहीं रहा था कि उनका लंड काम भी करता होगा। एक तो हाथ में लाठी लिए हुआ था।

कोई दस बजे रुक्मणि सुषमा को कमरे में ले गई।

बेटा ये यूसुफ चाचा हैं और ये अकरम चाचा ! दोनों तेरे ससुर के दोस्त हैं ! वो बोली।

दोनों आदमी एक दूसरे के कपड़े उतारने लगे। उधर रुक्मणि एकदम नंगी हो गई और सुषमा को भी नंगा कर दिया। यह देख कर लल्लू लाल जी भी नंगे हो गए। सुषमा ने देखा कि दोनों बूढ़ों के औजार लटके हुए थे और आंड नीचे झूल रहे थे। दोनों बूढ़े रुक्मणि के आगे खड़े हो गए और रुक्मणि उनके लौड़े एक एक करके चूसने लगी।

भाभी लंड चूसने में तुम्हारा मुकाबला नहीं ! बूढ़ों को भी जवानी चढ़ जाए ! यह कह कर अकरम हंसे।

उधर लल्लू लाल जी ने सुषमा के मुंह में अपना मोटा सुपारा ठूंस दिया। सुषमा मज़े से चूसने लगी। सुषमा ने देखा कि कोई 5 मिनट की चूसाई के बाद दोनों बूढ़ों के लंड तन गए थे। उसने देखा कि एक बूढ़े का लंड तो 6 इंच था मगर मोटाई उसकी कलाई जितनी थी, दूसरे का पतला था मगर लंबाई पूरी नौ इंच थी।

अब देखो तुम्हारे लंड तैयार हैं मेरी बहू की चुदाई की लिए ! रुक्मणि बोली।

सुषमा को लल्लू लाल जी ने बिस्तर पर लिटाया और उसके मुंह मे अपना लंड डाल दिया। उधर अकरम ने सुषमा की टांगें चौड़ी की और अपना मोटा लंड भीतर डाल कर सुषमा को चुदाई के मज़े देने लगा। सुषमा को मज़ा आ रहा था। ससुर उसके मुंह की चुदाई कर रहे थे और अकरम चूत की।

उधर सुषमा ने देखा कि यूसुफ ने रुक्मणि को घोड़ी बनाया हुआ था। रुक्मणि जितनी बड़ी गांड सुषमा ने जिंदगी में नहीं देखी थी। ऐसा लगता था कि जैसे दो बड़े बड़े मटके हों।

यूसुफ रुक्मणि की गांड को उंगली से चोद रहा था, साथ ही थूक भी लगा रहा था।

सुषमा को अब समझ में आया कि उसकी सास पतले और लंबे लंड कहां लेती है।

भाभीजान, आपकी गांड है या घड़ा? युसुफ बोले और अपने लंड को घुसाने लगे। रुक्मणि दर्द में चिल्ला रही थी- मेरी मटकी आज फोड़ ही दो ! यह कह कर वो अपनी गांड हिलाने लगी। युसुफ धीरे-धीरे रुक्मणि को चोदने लगे। उधर अकरम ने रफ्तार बढ़ा दी थी।

चाचा इतना जोर से नहीं ! सुषमा बोली।

लल्लू लाल जी ने अपना लंड सुषमा के मुंह से निकाला और युसुफ के पीछे पहुंच गए। दो चम्मच तेल उन्होंने युसुफ की गांड में लगाया और एक ही झटके में अपने तगड़ा लंड यूसुफ की गांड में पेल दिया। यूसुफ दोनों तरफ से मज़े ले रहा था।

भाभी मैं झड़ने वाला हूं ! कह कर उन्होंने रुक्मणि की चूत अपने वीर्य से भर दी। उधर लल्लू लाल जी ने स्पीड बढ़ा दी थी और उन्होंने अपनी टंकी यूसुफ की गांड में खाली कर दी।

इधर अकरम का पानी निकलने वाला था। सुषमा दो बार चरमसीमा पर पहुंच चुकी थी और अकरम का गरम फव्वारा उसके अंदर छुट गया।

चुदाई के बाद दोनों बूढ़े बोले- भाभी, एक बार बहू को हमारे घर लाओ !

रात भर वहाँ जम कर चुदाई चली। दो महीनों बाद सुषमा को उल्टियां आने लगीं।

लल्लू लाल जी, रुक्मणि, सुरेश भी सभी खुश थे।

Kahani padhne ke baad apne vichar comments mein zaroor likhein – Ravi Kumar

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