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Hindi Sex Stories – हिंदी सेक्स कहानियाँ

सैर पर मिले लड़के ने लड़की बन कर गांड मरवाई


क्रॉस ड्रेसिंग गे सेक्स कहानी में एक गोरे चिट्टे लड़के से मेरी दोस्ती हुई. उसके चूतड़ बड़े थे, मैंने उन्हें हाथ से मसल कर कहा कि तेरी गांड बहुत मजेदार है. वह मुझे अपने घर ले गया.

नमस्कार दोस्तो,
यह जो कहानी आज मैं आपको बताने जा रहा हूं … वह मुझे अपनी किसी प्रशंसक ने मेल की थी और उसने अपनी जानकारी गुप्त रखने के लिए कहा है.
तो मैं कहानी में जो नाम और शहर के बारे में बताऊंगा, वह सिर्फ अपने मन से बताऊंगा.

उसके अलावा जो कुछ भी क्रॉस ड्रेसिंग गे सेक्स कहानी में होगा, वह उसी प्रशंसक के शब्द होंगे.

मेरा नाम अभिमन्यु सिंह है और मैं 27 साल का हट्टा-कट्टा नौजवान मर्द हूं.
मैं एक प्राइवेट कंपनी में काम करता हूं.
मुझे रोज सुबह ग्राउंड में जाकर रनिंग और एक्साइज करने की आदत है.

मुझे चोदने का बहुत शौक है, मेरे इस शौक ने ही मुझे बायसेक्सुअल बना दिया है.
क्योंकि जहां मैं रहता हूं, वहां की लड़कियां चुदाई में ज्यादा एक्टिव नहीं हैं, उन्हें बस लंड लेने से मतलब है.

वे नई सेक्स पोजीशन ट्राई ही नहीं करती हैं इसलिए फिर मैंने लड़कों की भी गांड मारना चालू कर दिया है.
यहां के लड़के गांड मरवाने में बड़ा मजा लेते हैं और वे नई नई सेक्स पोजीशन में भी गांड मरवाते हैं.

मैंने अभी तक कुछ 4 लड़कियां चोदी हैं और 13 लड़कों की गांड की ठुकाई की है.

पांच लड़कों की गांड तो सील पैक थी. उनकी गांड की सील मेरे लंड ने ही तोड़ी थी.
साले बहुत बिलबिलाए थे.

जैसा कि मैंने आपको पहले ही बता दिया है कि मैं रोज सुबह ग्राउंड में रनिंग और एक्साइज करने जाता हूं, तो ऐसे ही एक दिन मुझे वहां एक नया चेहरा दिखा.
वह भी वहां रनिंग करने आया था.

मैंने उससे बात करनी चालू की, तब मुझे पता चला कि वह रेलवे में काम करता है और उसका अभी ही इस शहर में ट्रांसफर हुआ है.
उसका नाम विजय वर्मा था.
वह 31 साल का था और गोरा चिट्टा मर्द था.

हल्की फुल्की बातचीत होने के बाद हम दोनों ने साथ में रनिंग और एक्साइज की.

सुबह 8 बजे तक ग्राउंड खाली होने लगता है और मैंने इसकी बात का फायदा उठाया.
मैंने उसके साथ 8.30 बजे तक एक्साइज की.

उसके बाद जैसे ही वह टॉयलेट करने ग्राउंड के रेस्ट रूम गया तो मैं भी उसके पीछे पीछे चला गया.
वहां हम दोनों साथ में मूतने लगे.

उसी वक्त मैंने अपना हाथ उसकी गांड पर रखा और उसकी गांड को दबाकर कहा- विजय भाई, तुम्हारे हिप तो बहुत टाइट और बड़े हैं, लगता है हिप की एक्साइज ज्यादा करते हो!
विजय ने कुछ नहीं कहा, बस उसने मुझे एक स्माइल दी और वहां से चला गया.

ऐसे ही 4 दिन बीत गए और हम दोनों अच्छे दोस्त बन गए.

रविवार को जब हम दोनों एक्साइज करके मूतने गए तो विजय बोला- अरे अभिमन्यु, मेरा एक काम करेगा क्या?
मैंने कहा- हां बोलो ना विजय भाई!

विजय बोला- आज मेरी छुट्टी है, मुझे मार्केट से कुछ सामान भी लाना है … पर मेरे पास बाइक नहीं है और मैं रेलवे क्वार्टर में भी अकेला रहता हूं तो क्या तुम मुझे अपनी बाइक से मार्केट ले जाओगे?

मैंने भी उससे हां कर दी और उसके बाद मैं उससे उसका मोबाइल नंबर लेकर अपने घर आ गया.
मैं जल्दी से नहा कर तैयार हुआ और बाइक लेकर उसको लेने रेलवे क्वार्टर पहुंच गया.

वहां पहुंच मैंने उसे कॉल किया और उसका क्वार्टर कौन सा है … ये पूछा.

उसके बाद मैं सीधा उसके क्वार्टर के सामने ही रुका.
उसने मुझे अन्दर आने को बोला.

मैं जैसे उसके क्वार्टर में घुसा, तो मैंने देखा कि उसने अन्दर रूम में कपड़े सुखाने के लिए एक रस्सी बांध रखी है. उसने उस रस्सी पर अपने कपड़े और कुछ चड्डियां सूखने डाल रखी हैं.

उसकी चड्डियां देख कर मेरा लंड टनटनाने लगा क्योंकि उसकी चड्डियां बहुत ज्यादा मॉर्डन फैशन वाली थीं, जैसे लड़कियों की पैंटी होती हैं. मतलब सिर्फ आगे से लंड के आकार वाला कपड़ा था और पीछे से एक पतली सी पट्टी थी, जो पहनने वाले की गांड के बीच में घुस जाए.
विजय ने मुझे उसकी चड्डी को घूरते हुए देख लिया था, पर वह कुछ नहीं बोला.

उसके बाद वह मेरे लिए पानी लाया और खुद चेंज करने चला गया.
जैसे ही वह चेंज करके आया, हम दोनों मार्केट के लिए निकल गए.

मार्केट से उसने कुछ कपड़े लिए, घर के लिए कुछ सामान लिया … फिर हम वापस उसके क्वार्टर आ गए.
उसने जो कपड़े लिए थे, वे मुझे पहन कर दिखाने लगा.

उसने मेरे सामने ही अपनी पैंट और शर्ट खोल दी.
उसकी उस अंडरवियर से मुझे उसकी गोरी गांड साफ दिखाई दे गई.

उसने पहले पैंट पहनी, उसे पैंट कुछ टाइट सी लगी.

उसने मुझसे पूछा- अभिमन्यु जरा देख तो सही, मेरी पैंट हिप से ज्यादा टाइट है क्या?
मैंने कहा- थोड़ी टाइट तो है पर तेरे हिप भी तो इतने बड़े और टाइट हैं कि पैंट तो टाइट लगेगी ही.

विजय मेरे पास आया और अपनी गांड मेरी तरफ करके बोला- तू जरा अपने हाथ से टच करके तो देख, क्या पैंट ज्यादा टाइट लग रही है?

मुझे तो इस ही मौके का इंतजार था, मैंने उसकी गांड पर अपना हाथ रखा और उसकी गांड को दबाने लगा.

मैं बोला- पैंट की फिटिंग तो सही है यार … इसमें तेरे हिप भी बड़े सेक्सी लग रहे हैं.
इतना बोल कर मैं अपना हाथ उसकी गांड के बीच में डाल उसकी गांड के छेद को रगड़ने लगा.

विजय भी ‘आआ आह’ की आवाज निकालने लगा.

फिर जब मुझे लगा की मामला पूरा सैट है तो मैंने एक ही झटके से उसकी पैंट को नीचे खींच लिया और उसकी गांड मेरी आंखों के सामने आ गई.
विजय ने भी मेरा पूरा साथ दिया और अपनी गांड को मेरे मुँह में घुसा दिया.

मैंने थोड़ी देर उसकी गांड को चाटा, फिर उसने अपनी गांड मेरे मुँह से हटाई और अपने घुटनों पर आ गया.
वह मेरी पैंट खोलने लगा तो मैंने भी पैंट खोलने में उसकी पूरी मदद की.

फिर वह मेरे लंबे और खीरे जैसे मोटे लंड को देख खुश हुआ और उसे चूसने लगा.
मुझे तो परमसुख मिलने लगा- आह्ह यस येस स्सस चूसो पूरा इसे … आह आईआ उह्ह्ह्ह कम ऑन!

उसने मेरा लंड कुछ मिनट तक चूसा और अब मेरा लंड लड़ने को तैयार था.

मैंने विजय का सिर पकड़ा और जोर जोर से उसका सिर आगे पीछे करने लगा.

विजय के मुँह में से पूरा थूक बाहर निकल रहा था जो कि मेरे लंड से होते हुए मेरे गोटों तक रिस रहा था … और विजय से मुँह से ‘गुहह गुहह’ की आवाज आ रही थी.

जैसे ही मेरा माल निकलना चालू हुआ, मैंने अपनी गांड और ऊपर करके अपना लंड विजय के गले तक घुसेड़ दिया और अपने माल की आखिरी बूंद गिरने तक लंड को उसके गले में डाले रखा.

फिर जैसे ही मैंने अपना लंड बाहर निकाला तो विजय खांसने लगा.

उसका पूरा मुँह थूक से लथपथ था और मेरा लंड भी विजय के थूक से भीगा हुआ था.

विजय कुछ देर वहीं नीचे जमीन पर बैठा रहा … फिर वह उठ कर बाथरूम में मुँह धोने चला गया.
मैं भी उसके पीछे पीछे चला गया.

विजय खड़ा खड़ा अपना मुँह धो रहा था और मैं पीछे से अपने घुटनों पर बैठ उसकी गांड चाट रहा था.

उसकी गांड में जैसे ही मैंने अपनी जीभ घुसाई, विजय आउच की आवाज निकाल बैठा.
इतने में मेरा मोबाइल बजने लगा.

मैंने देखा तो मेरे घर से कॉल मुझे घर जाना पड़ा.
पर मैंने विजय को बोला कि आज रात मैं काम को पूरा करने के लिए वापस आऊंगा.

मैं घर गया पर मेरे दिमाग में विजय की गांड की घूम रही थी.
पूरा दिन उसको कैसे चोदूँ, यही सब सोचता रहा.

फिर जैसे ही शाम हुई, विजय का ही कॉल आ गया कि अब कितनी देर लगेगी आने में?
मैंने उससे 8 बजे का बोला और घर में बोल कर निकला कि दोस्त के घर जा रहा हूं, रात वहीं रुकूंआ … ऑफिस का कुछ काम बाकी है, वह करने के लिए जाना जरूरी है.

मैं विजय के क्वार्टर में पहुंचा.
उसका दरवाजा खुला ही था, मैं अन्दर चला गया.
विजय अपने कमरे में था.

मैंने उसके कमरे का दरवाजा खटखटाया तो उसने मुझे बाहर ही रुकने को बोला.

कुछ मिनट बाद उसने अपने कमरे का दरवाजा खोला और वह मेरे सामने आ गया.

उसे देख कर मैं तो पागल ही हो गया.
विजय पूरा लड़की की तरह तैयार हुआ था.
वह बिल्कुल भी पहचान में नहीं आ रहा था.

उसे देख कर मेरा मुँह खुला का खुला ही रह गया.

विजय ने अपनी आवाज को पतला किया और बोला- क्यूं जी, कैसी लग रही हूं?
मैंने बोला- विजय भाई, ये सब क्या है?

तो विजय मेरे पास आया और मेरे होंठों पर अपनी उंगली रख कर बोला- विजय नहीं … वेलमा कहिए जी!

फिर वेलमा बने विजय ने घर का दरवाजा बंद कर दिया.
उसने सारी लाईट्स भी बंद कर दीं … बस लाल रोशनी वाली छोटी छोटी लाइट्स चालू रखीं.
उन लाइट्स की रोशनी में बस हम दोनों एक दूसरे को देख पा रहे थे.

उसके बाद उसने रोमांटिक गाने बजाए और मुझे अपने साथ लेकर नाचने लगी.

वह किसी सेक्सी लड़की की तरह अपनी पतली कमर मटका रही थी.

क्रॉस ड्रेसिंग गे सेक्स कहानी में अब से मैं विजय की जगह वेलमा नाम ही बोलूँगा दोस्तो, आप समझ जाना.

पहले मैं आपको वेलमा के बारे में बता देता हूँ कि उसने क्या पहना था.

वेलमा ने काले रंग की नेट वाली साड़ी पहनी थी, ऊपर एकदम कसा हुआ टाइट बैकलेस ब्लाउज पहना हुआ था.

इसके अलावा उसने अपने सिर पर लंबे बालों के लिए एक विग पहनी थी.
हाथों में ब्लैक कलर की कांच की चूड़ियां पहनी थीं.
कानों में बड़े वाले इयरिंग थे.

उसने मेहरून कलर की लिपस्टिक लगाई हुई थी और हाई हिल्स पहन रखी थीं.

मैंने डांस करते हुए अपना हाथ उसकी कमर पर रखा हुआ था … पर कमर से मेरा हाथ उसकी गांड तक पहुंच गया था.
मैं उसकी मखमली गांड को दबाने लगा.

कुछ ही देर में वेलमा मेरे और नजदीक आ गई और मेरे होंठों को अपने रसीले होंठों से चूमने लगी.
हमारा यह चुम्मन कुछ मिनट तक बेताबी से चला.

फिर मैंने उसका पल्लू अपने हाथों से पकड़ा और उसके कंधे से नीचे खींच दिया.
वेलमा मुझे अपने रूम में जाने लगी.

चूंकि वेलमा का पल्लू मेरे हाथ में था, तो उसकी साड़ी पूरी उतर गई थी.
मैं उसकी साड़ी को वहीं फेंक कर कमरे में चला गया.

वेलमा पेटीकोट और ब्लाउज में बेड पर बैठी थी.
मैं भी उसके पास गया और उसकी गर्दन को चूमने लगा.
अपने हाथों से मैं उसके बूब्स को दबाने लगा.

फिर मैंने उसके ब्लाउज का हुक खोला.
वेलमा ने अन्दर काले रंग की ब्रा पहन रखी थी जिसे मैंने तुरंत उतार दिया.

अब मैं उसके भरे हुए मम्मों को चूसने लगा.
काफी देर तक उसके दोनों बूब्स चूसने के बाद मैंने उसके पेटीकोट का नाड़ा भी खोल दिया.

अन्दर उसने काली पैंटी पहनी थी, जिसको मैंने उतार दिया.
अब वह पूरी नंगी मेरे सामने थी.

मैंने भी अपने सारे कपड़े उतार दिए.
वेलमा को मैंने उल्टा लेटाया और उसकी गांड को खूब देर तक चाटता रहा.
अपनी जीभ से मैं उसकी गांड चोदने लगा.

वेलमा गर्मा गई और बोली- मुझे अब और न तड़पाओ प्लीज!

मैंने उसे सीधा लेटाया और हम दोनों 69 की पोजीशन में आ गए.
उसकी 4 इंच की लुल्ली मेरे मुँह में थी … और मेरा 8 इंच लौड़ा उसके मुँह में था.

हम दोनों एक दूसरे का आइटम बड़े मजे से चूस रहे थे.
जब मेरा लौड़ा पूरा कड़क हो गया तो मैंने वेलमा को घोड़ी बनाया और अपने लंड पर कंडोम चढ़ा लिया.

मैं वेलमा की गांड के छेद को रगड़ने लगा.

इससे वह तड़कने लगी और यह आह करने लगी.
मुझे उसे तड़फता देख कर मजा आ रहा था.

मैंने वेलमा की गांड पर थूक लगाया और अपने लंड को उसकी गांड में डालने लगा.

वेलमा की गांड पहले से ही खुली हुई थी, तो मेरा लंड आराम से अन्दर चला गया.
मैंने वेलमा की गांड मारना चालू कर दी.

दस मिनट तक मैं उसे घोड़ी बना कर चोदता रहा.
उसके बाद मैं सीधा लेट गया और वेलमा काउबॉय सेक्स पोजीशन में मेरे ऊपर बैठ गई.

उसने जोर लगाया तो घपाक से मेरा लंड अन्दर घुस गया और वह मजे से लेने लगी … मेरे लौड़े के ऊपर नीचे होने लगी.

वेलमा की गांड की गर्मी मुझे कंडोम के अन्दर भी महसूस हो रही थी.

मैंने वेलमा को बहुत देर तक 5 अलग अलग सेक्स पोजिशन में चोदा.

उसके बाद जब मेरा माल निकलने को हुआ तो मैंने वेलमा से पूछा कि कहां गिराऊं?
तो उसने कहा- मेरे मुँह में गिराओ … तुम्हारे माल को मैं पीना चाहूगी.

मैंने अपना लंड उसकी गांड से निकाला और कंडोम को हटा कर पाना लंड वेलमा के में दे दिया.

वेलमा मेरा लंड मजे से चूसने लगी और कुछ ही पलों में वह मेरा सारा माल पी गई.
उसने मेरा पूरा लंड चाट कर साफ कर दिया.

उसके बाद मैं वेलमा के पास नंगा ही लेट गया.
हम दोनों पूरे पसीने से भीग चुके थे.

वेलमा के बदन से अब परफ्यूम की खुशबू, बदन के पसीने की खुशबू में बदल गई थीं.

उसके बाद हम लेटे लेटे ही सो गए.

रात में करीब डेढ़ बजे मेरी नींद खुली तो मैं मूतने चला गया.
मैं मूत कर वापस आया तो वेलमा भी जाग चुकी थी और उसकी नजर मेरे लटकते हुए लौड़े पर थी.
मैंने भी बिना देरी के अपना लौड़ा उसके मुँह में दे दिया.

उस रात हम दोनों 3 बार चुदाई करके सुबह 4 बजे सोए.

सुबह 9 बजे वेलमा ने मुझे उठाया.
वह काम पर जाने के लिए तैयार था.

मैं भी अपने कपड़े पहन घर को निकल गया.

दोस्तो, अगली में लिंग परिवर्तन करवा कर लड़की बन गई वेलमा ने मुझे अपना बलमा बनाकर सुहागरात का किस तरह से मजा लिया, वह वर्णन करूंगा.
मेरी इस क्रॉस ड्रेसिंग गे सेक्स कहानी पर आपके विचार मुझे प्रोत्साहित करेंगे.

क्रॉस ड्रेसिंग गे सेक्स कहानी से आगे की कहानी: लिंग परिवर्तन करवा के शादी और सुहागरात

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