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Hindi Sex Stories – हिंदी सेक्स कहानियाँ

प्यार जताने का सुख - सेक्स कहानी


मैं नियमित पाठक हूं। यहां की कहानियां पढ़कर लगा अपनी सेक्स अनुभूति बतानी चाहिए, जिसे पढ़ लड़के मुठ मारेंगे और लड़कियां, भाभियां लंड तलाशेंगी।

दोस्तों, कई कहानियां पढ़ीं। सब बनावटी लगीं। कोई इतनी आसानी से औरतों को सेक्स के लिए तैयार नहीं कर सकता। औरतें इतनी भूखी नहीं। अगर हैं तो मेल का जवाब देतीं।

ये छोड़ें! अपनी बात पर आते हैं।

सबसे पहले खुद के बारे में। 24 साल, कद 5'7", सामान्य दिखने वाला लड़का। वाराणसी से।

दो साल पहले भैया की शादी थी। रिश्तेदार आए। चाचा की बेटियां भी। उनमें प्रिया। फिगर कयामत। अप्सरा सी।

खानदान में सबकी इज्जत। वो भी। शादी दो दिन बाकी। उसे देख पागल। प्यार जताने का सोचा। गांड फटी लेकिन हिम्मत जुटाई। घर खाली। चाय बनाने को कहा। चाय लाई। पूछा उसकी चाय? बोली नहीं बनाई।

जबरदस्ती कप लिया, चाय दी, पास बिठाया। पीते पूछा, अच्छा लगता हूं?
हां बोली।

तुरंत दिल की बात कही, आंखें बंद।
“जान, ये सुनने को बेताब थी। मैं भी प्यार करती हूं।”

फिर क्या! होंठ चिपकाए, गुलाबी होंठ चूसे। वो भी पीने लगी। ऊपर नीचे चूसे। 10 मिनट चिपके। अलग हुए तो रोई। बाहों में लिया, पीठ सहलाई...

धीरे गर्म हुई। छूते लंड खड़ा। गले पर किस।

“क्या कर रहे?”
“कुछ मत बोलो, करने दो। तुम्हारे बारे में सोचता रहता।”

शरमाई, चेहरा छिपाया। मौका, सलवार का नाड़ा खोला। सलवार कमर से नीचे। नंगी जांघ पर हाथ। पैंटी में चूत की ओर। झुरझुरी। झांटें छुईं। हाथ थामा।

“अजय... ना... मर जाऊंगी...” आंखें बुला रहीं, शर्म रोक रही।
“प्रिया... प्लीज... मत रोको... जिस्म आग है... जलने दो।”
“हाय अजय... पाप है।”
“नहीं... मर्द-औरत की जरूरत... देखो ये मांग रहा।”

पैंट जिप खोली, तना लंड दिखाया।
“हाय... सम्हालो...” हाथ बढ़ाकर पकड़ा।
“साथी चाहिए... मिला दो...”
“अजय हाय...” मुझे ऊपर गिरा लिया।
“होंठों पर ना, दिल में हां... कपड़े हटा दो...”

उठा, पैंटी उतारी। गदराई जवानी नंगी। झांटें चूत सजाईं। पंखुड़ियां फड़फड़ाईं, गीली। पैंट उतारी। समीज उतारी। बूब्स छले, गोरे भारी, भूरे निप्पल।

बूब्स भरे।
“अजय हाय...” तड़पी।

लंड पकड़ हिलाया। उत्तेजित, हाथ से चोदा। सुपाड़ा कसा, चमका।

प्रिया ने छोड़ा, “देख चूत तड़प रही... चोद दे...”
चूत सहलाई, दो उंगलियां डाली। मचली, सिसकारियां।

इंतजार न हुआ। गोदी में उठाया, लिटाया। बूब्स मसले। होंठ खोए।

15 मिनट बाद अलग, टांगें फैलाईं। चूत फैलाईं। खुश किस्मत। 7.5" लंबा 2.5" मोटा लंड सुपाड़ा चूत पर, सरकाया।

चीखी, “निकालो, मर जाऊंगी।”

नहीं रुका। दूसरा धक्का, पूरा समाया। तड़पी। दर्द कम करने लंड रोका। चिल्लाहट बंद तो अंदर-बाहर।

मजा... आह्ह... फच फच...
गांड उठाकर साथ दिया।

घड़ी आई, आनंद में खोया। शॉट्स मारे। बिजली सी, वीर्य चूत में। निढाल गिरा।

होश आया, कपड़े पहने।

मुस्कुराई, चूमा, बाथरूम गई। लौटी तो फिर चोदा। किसी आने से पहले अलग कमरों में।

रात सोया न, चुदाई सोची। शादी हो गई, प्रिया चली। फिर न मिले। अब शादीशुदा।

कैसी लगी सच्ची घटना, कमेंट्स में बताएं।

Kahani padhne ke baad apne vichar comments mein zaroor likhein – Vikram Patel

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