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Hindi Sex Stories – हिंदी सेक्स कहानियाँ

प्रिया की प्रारंभिक अनुभूति


मैं एक समर्पित कथा प्रेमी हूं। आज मैं आपको अपनी प्रथम कामुक घटना के बारे में वर्णन करने जा रहा हूं। मुझे विश्वास है कि यह आपको रोमांचित कर देगी। कृपया अपनी राय साझा करें। अब बिना अधिक विलंब के मैं अपनी व्यथा पर आता हूं।

मेरी आयु अड़तीस वर्ष है और मैं विवाहित हूं। तथापि यह हालिया प्रसंग है जो आपको उत्तेजित करने पर विवश कर देगा।

मैंने जयपुर में एक नया भोजनालय स्थापित किया था जहां वह आ곤ी जाती थी।
उसकी आयु लगभग इक्कीस वर्ष की रही होगी और वह एक सुडौल काया वाली पतली एवं लंबी युवती थी।
वह सदैव उदास प्रतीत होती थी और उसके मुख पर मुस्कान दुर्लभ ही दिखाई देती थी।

एक दिवस वह एकलौती आई और रो पड़ी तो मैं सहन न सका तथा उसके निकट पहुंच गया।

मैंने उससे उसका नाम जाना और रोने का कारण भी।

तब तक मेरे अंतर्मन में उसके प्रति कोई कामुक भावना नहीं थी, मैं तो केवल मानवता के आधार पर उसकी निराशा का कारण जानने उसके पास गया था।

मेरे प्रश्न पर उसने अपना नाम प्रिया बताया और मुझसे आलिंगन कर रोने लगी।

मैंने उसे तत्काल हटाया किंतु पश्चात उसे बाहर बुलाकर अपनी वाहन में विराजमान कर रोने का कारण पूछा तो उसने कहा कि एक रवि नामक युवक ने उसके हृदय को आहत किया था जिससे वह अत्यधिक प्रेम करती थी।
जबकि वह युवक अब किसी अन्य युवती के साथ विचरण कर रहा है, जो उसे असह्य था तथा वह उस दिन से उदास रहने लगी थी।

मैं उसके अश्रु सहन न सका इसलिए मैंने उसे सांत्वना दी कि वह दुखी न हो तथा घटित को विस्मृत कर दे क्योंकि जीवन अभी लंबा है, उसकी नियति में कोई अन्य उत्तम युवक होगा।

मैंने वाहन में ही उसके शरीर को स्पर्श किया और उसे सांत्वना देने लगा।

अनायास ही मेरा हस्त उसकी पृष्ठभाग पर गया जहां उसके ब्रा का पट्टा मेरे हस्त को स्पर्श कर रहा था।

वह मुझसे कहने लगी- आप अत्यंत सराहनीय हैं! आपकी संगति मुझे अत्यंत रुचिकर लगती है।

तो मैंने कहा- जब भी निराशा हो तो मुझसे दूरभाष पर संपर्क कर लेना।

और हमने दोनों ने अपने दूरभाष अंकों का आदान-प्रदान किया।

अब वह मुझे बारंबार दूरभाष करती और मैं उसे बालिका मानकर उसे प्रसन्न रखने के प्रयास में उसके साथ वार्तालाप करने लगा।

एक दिन मैं उसे चलचित्र प्रदर्शन के लिए ले गया जिसका शीर्षक था हत्यारा।

इमरान हाशमी के चुंबन दृश्य देखकर मैं क्षणभर के लिए भूल गया कि वह मेरे समक्ष एक युवा बालिका है तथा मुझे उस दृष्टि से नहीं देखती।

परंतु मैं सहन न सका तथा मैंने उसे आलिंगन में ले लिया और उसके ओष्ठों का गहन चुंबन ग्रहण कर लिया।

तो वह मुझसे क्रुद्ध हो गई तथा कहने लगी- आप मुझसे आयु में अत्यधिक वृद्ध हैं तथा मैं आपका अत्यंत आदर करती हूं, ऐसी नीचता की अपेक्षा मैंने आपसे न की थी।

तो मैं आश्चर्यचकित हो गया तथा संपूर्ण चलचित्र के दौरान उससे दूरी बनाए रखी तथा कोई संवाद न किया।

चलचित्र समाप्त होते ही मैंने उसे वाहन में विराजमान किया तथा एक बार क्षमा याचना कर उसके साथ कोई वार्तालाप न किया।
पूरे मार्ग हम मौन रहे।

मैंने उसे उसके निवास उतरते समय पुनः क्षमा मांगी तथा सोचने लगा कि मुझसे ऐसी अल्प बुद्धि कैसे हो गई।
मुझे उसके चुंबन की स्मृति हो आई।

दो दिवस तक उसका दूरभाष न आया तो मैंने अनुमान लगाया कि प्रिया उस दिवस की घटना से क्रुद्ध हो गई है तथा मुझसे संबंध विच्छेद कर लिया है, किंतु पश्चात एक दिन वह मेरे भोजनालय पर आई तथा मेरे निकट विराजमान हो गई।

मैं उसे देखकर अत्यंत प्रसन्न हुआ किंतु अत्यधिक सतर्कता बरतने लगा कि कहीं पुनः कोई त्रुटि न हो जाए जिससे वह मुझसे क्रुद्ध न हो।

अकस्मात वह बोली- क्या मुझे अपनी कार में लंबी सैर पर नहीं ले जाओगे?

मैंने हाल ही में एक नई आयातित कार प्राप्त की थी इसलिए उसे ले गया।

वर्षा ऋतु थी तथा वह मेरी चालन सीट के समीप बैठी थी, उसने मुझसे कहा- उस दिवस की घटना पर मैंने बहुत चिंतन किया तथा मुझे लगा कि आपने कोई भूल न की थी तथा गहन विचार के पश्चात मुझे केवल आपका मेरे प्रति प्रेम ही दिखा।

मैं यह भूल चुकी हूं कि आप मुझसे आयु में इतने वृद्ध हैं, मैं भी अब आपसे प्रेम करने लगी हूं।

वार्तालाप में ही वह आप से तुम पर आ गई थी, यह मुझे उचित लगा तथा मैंने उसे अपनी बाहों में समेट लिया तथा बलपूर्वक उसे चूमने लगा।

इस बार उसने कोई प्रतिरोध न किया वरं मेरा सहयोग करने लगी।

मैंने अनेक युवतियों का संभोग किया था किंतु उसके समान चुंबन का आनंद मुझे कभी न मिला था इसलिए मैं उसे लगभग बीस मिनट तक चूमता रहा।

कार एक पार्श्व पर स्थिर थी तथा वर्षा के कारण राजमार्ग पर कोई दृश्यमान न था इसलिए मैंने उसे कार की पश्च सीट पर जाने को कहा तथा मैं भी पश्च भाग में गया।

आयातित कार की पश्च सीट एक विशाल शय्या बन जाती है इसलिए मैंने उसे विस्तृत कर उसे अपनी बाहों में ले लिया तथा पुनः उसके ओष्ठ चूसने लगा।

इस बार उसने भी अपनी जिह्वा मेरे मुख में प्रविष्ट कर दी तथा मुझे अधीरता से चूमने लगी।
मेरे हस्त धीरे-धीरे उसके शरीर पर सरकने लगे थे।
मैंने उसकी टी-शर्ट ऊर्ध्व उठा दी तथा उसके उरःस्थल एक हस्त से दबाने लगा तो वह मेरे और निकट आ गई, उसके मुख से अब सिसकारियां निकलने लगीं, उसका मुख अभ्रल हो गया, उसकी नेत्र बंद हो गए तथा वह मुझसे ऐसी आलिंगित हो गई जैसे कोई लता वृक्ष से।

अंततः मैंने उसकी टी-शर्ट एवं ब्रा दोनों निष्कासित कर दिए। हे ईश्वर! उसके उरःस्थल कितने सुंदर थे! लघु किंतु अत्यंत दृढ़!

अब उससे भी धैर्य न हो रहा था इसलिए वह मुझसे कहने लगी कि उसे कुछ अनुभव हो रहा है।

यह उसका प्रथम अवसर था इसलिए उसे बोध न हो रहा था कि उसे क्या घटित हो रहा है।

मेरा भी इस प्रकार इस अल्प आयु वाली युवती के साथ प्रथम ही था।

मैंने उसका हस्त पकड़कर अपने लिंग पर रख दिया जो विकसित होकर एक कठोर लौह दंड के समान हो गया था।

प्रारंभ में उसने उसे ग्रहण करने से इनकार किया किंतु पश्चात सहमत हो गई तथा उस पर स्पर्श किया।
किंतु वह अभी भी लज्जित हो रही थी तथा हस्तों को कोई गति न दे रही थी।

इसलिए उसकी लज्जा दूर करने हेतु मैंने अंत में अपनी पैंट एवं अंतर्वस्त्र खोलकर संपूर्ण लिंग प्रकट कर उसके हस्त में दे दिया जो अब तनकर लगभग सात इंच का हो गया था तथा विकसित होकर तीन इंच के लौह नलके के समान कठोर भी हो गया था।

वह अभी भी संकोच कर रही थी इसलिए मेरे लिंग पर हस्त रखकर विराजमान रही।

अब मैंने विलंब न करते हुए उसकी जींस उतार दी।

उसने अल्प प्रतिरोध किया, पश्चात सहमति दी तो मैंने उसका अंतर्वस्त्र भी निष्कासित कर दिया।

अब हम दोनों नग्न थे।
मैंने उसके दृढ़ उरःस्थलों को चूसना प्रारंभ किया।

अकस्मात मैंने अपने लिंग पर उसके हस्त का दाब अनुभव किया तो मेरे रोमांच खड़े हो गए।

मैंने उसकी योनि के दर्शन हेतु अपना शीर्ष अधोमुख किया- क्या योनि थी उसकी! हल्के स्वर्णिम रोम ही उसके ऊर्ध्व भाग पर थे! तथा इतनी संकुचित थी कि मेरी एक अंगुली भी कठिनाई से प्रविष्ट हो सके।

मैंने उसकी योनि को एक हस्त से रगड़ना आरंभ किया तो दूसरे हस्त से उसके उरःस्थल दबाने लगा तथा मेरे ओष्ठ अभी भी उसके ओष्ठों को चूस रहे थे।

वह भी मुझे समान सहयोग दे रही थी।
उसकी नेत्र नशे में बंद हो गए थे तथा वह अधीरता से मेरे लिंग को हस्तों में लेकर अपनी योनि पर रगड़ने लगी।

मैंने लिंग को योनि से स्पर्श कराया तो मुझे वहां आर्द्रता अनुभव हुई।

मैंने अंगुली से जांचा तो उसकी योनि जल छोड़कर एकदम चिकनी एवं उत्तम हो गई थी।

मैंने अब विलंब न करते हुए उसे शयन कराया तथा उसके ऊर्ध्व आ गया।

मैंने पूछा- क्या कभी संभोग किया है?

तो उसने नकार दिया।
मैंने अब हल्के से अपने लिंग के शीर्ष को उसकी योनि में प्रविष्ट किया तो वह पीड़ा से तड़प उठी तथा मुझे अपने ऊर्ध्व से धकेलने लगी।

किंतु मैंने उसे दृढ़ता से पकड़ रखा था इसलिए वह हिल न सकी।
अब मैं अधिक लिंग अंतः प्रविष्ट करने के स्थान पर उतना ही डालकर उसके उरःस्थल दबाने लगा, साथ में उसे चूमने लगा।

अल्प काल में ही उसकी योनि के जल के कारण लिंग के शीर्ष ने उसकी योनि में स्थान बना लिया तो वह अधो से अपने नितंब ऊर्ध्व-अधो करने लगी। अब मेरे अनुभव ने संकेत दिया कि योनि तैयार है, प्रहार करो।

तो मैंने हल्का प्रहार किया तथा मेरा आधा लिंग उसकी जलमय योनि में प्रविष्ट हो गया तथा वह बलपूर्वक चीखी।

मैंने अधो देखा तो उसकी योनि की झिल्ली फट चुकी थी तथा उसमें से रक्त की दो बूंदें बह आईं थीं।

परंतु मैंने उसके मुख को अपने ओष्ठों से पुनः बंद किया तथा आधा ही लिंग उसकी योनि में डालकर पुनः अपने मोटे लिंग के लिए स्थान बनाने लगा।

उफ़ क्या संकुचन था उसकी योनि में! ऐसा प्रतीत होता था कि मेरा लिंग छिल जाएगा। एकदम संकुचित से उसकी योनि की दोनों भुजाएं उसे जकड़ रखी थीं।

उसकी योनि बुरी रीति से विस्तृत होकर फैल गई थी तथा वह मेरी बाहों से मुक्त होने के लिए छटपटा रही थी किंतु मैं कहां उसे छोड़ने वाला था अब।

धीरे-धीरे उसके सुंदर एवं निष्कपट मुख पर से पीड़ा की रेखाएं कम होने लगीं तथा वह अपनी नितंब उछाल बैठी तो मैंने दृढ़ प्रहार किया कि मेरा संपूर्ण लिंग उसकी चिकनी योनि में समाहित हो गया तथा उसकी गर्भाशय से जा टकराया।

उसने पुनः चीखने का प्रयास किया किंतु मेरे ओष्ठों ने उसे रोक दिया।

अब मैं उसके ऊर्ध्व बिना कोई गति किए शयन रहा।

अल्प काल के पश्चात जब वह सामान्य हुई तो मैंने प्रहार आरंभ किए।

वह भी अब अपने दांतों को ओष्ठों से दाबकर होने वाली पीड़ा को सहन करने लगी।

फिर उसे पीड़ा का बोध कम हुआ तो उसने अपना मुख खोल दिया तथा अपनी नेत्र बंद कर लीं तथा प्रेम से अपनी नितंब उचकने लगी।

अब मैंने भी प्रहार अल्प तीव्र कर दिए थे।

अल्प काल में ही उसने मुझे बलपूर्वक आलिंगित किया तथा गहन श्वास लेने लगी तो मुझे ज्ञात हुआ कि उसका जल निकल गया है।

उसे उसकी योनि में बुरी रीति से फंसे मेरे मोटे लिंग का बोध पुनः होने लगा तथा वह मुझसे अपना लिंग निकालने को कहने लगी।

मैंने उसे धैर्य बंधाया कि अल्प पीड़ा होगी, प्रथम अवसर है इसलिए, किंतु पश्चात आनंद आएगा। वह अत्यधिक छटपटा रही थी किंतु मैंने उसे दृढ़ता से रखा था जिससे वह मुक्त न हो सकी।

मेरा लिंग अभी भी उसकी योनि में अत्यधिक संकुचित आ-जा रहा था।

इतनी संकुचित योनि मुझे लंबे काल के पश्चात मिली थी तथा इधर मेरा लिंग जल छोड़ने का नाम ही न ले रहा था।

इधर प्रिया की दशा अत्यंत विकट हो रही थी। मैंने अब बलपूर्वक प्रहार आरंभ कर दिए।

मेरे प्रहारों से वह एवं मेरी कार दोनों बुरी रीति से हिल रहे थे।

साठ से सत्तर प्रहारों के पश्चात अंततः मेरे लिंग ने जल उगलना प्रारंभ किया तो जैसे कि उसकी योनि में बाढ़ आ गई।

मेरे लिंग ने इतना सारा जल छोड़ा कि उसकी संकुचित योनि से भी रिसकर बाहर आकर उसकी नितंब के ऊर्ध्व से बहने लगा।
मेरा लिंग अभी भी संकुचित था तथा संकुचन का नाम न ले रहा था…

आगे की कथा दूसरे भाग में,

आपको मेरी एवं प्रिया की कथा कैसी लगी, अवश्य बताएं।

Kahani padhne ke baad apne vichar comments mein zaroor likhein – Arjun Sharma

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