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Hindi Sex Stories – हिंदी सेक्स कहानियाँ

क्या करूँ मैं? - भाग 2


हम दोनों आमने-सामने खड़ी थीं। जिमी ने बीच में वो लंबा डंडा फंसाया, एक सिरा अपनी चूत पर और दूसरा मेरी चूत पर सटा दिया।

नजारा बहुत रोमांचक था। हमने अपनी-अपनी पोजीशन संभाली और एक-दूसरे की चूचियाँ मसलते हुए कमर आगे की। डंडे के दोनों सिरे आँखों से ओझल हो गए। मेरी उत्तेजना आसमान पर थी। हम धीरे-धीरे आगे बढ़े और डंडा अंदर जाता गया। कुछ देर में हम दोनों के बदन आपस में टकरा गए।

जिमी का अंदाजा सही था—ठीक 6-6 इंच दोनों के हिस्से में आया। एक अजीब मस्ती हम पर छा गई। हम एक-दूसरे की चूचियाँ मसलते हुए होंठ चूसने लगे। तभी दरवाजे पर आहट हुई।

लगता है बाबूलाल आ गया! मैंने खुशी से कहा।

हाँ, वही कमीने की आहट है! जिमी ने कहा और मुझे झटके से अलग कर दिया। डंडा मेरी चूत से बाहर फिसला लेकिन जिमी की चूत में आधा फंसा रहा। मुझे लगा जैसे डंडा जिमी का अपना अंग बन गया हो। वो उसी हालत में चुचियाँ हिलाती हुई दरवाजे की तरफ बढ़ी।

दरवाजा खुलते ही बाबूलाल लड़खड़ाता हुआ अंदर आया। उसकी नजर सीधे उस डंडे पर ठिठकी—ऐसा लग रहा है ये तुम्हारा ही सामान है मैडम!

मुझे हंसी आ गई।

अब जमाना आ गया जब औरतों को डंडे लगवाने पड़ेंगे और तुम मर्दों को झुककर खाना पड़ेगा। जिमी ने दरवाजा बंद करते हुए कहा।

छोड़ो मैडम, वो जमाना दूर है। पहले हम तुम्हें अपना डंडा खिलाते हैं। उसने पजामा उतारते हुए कहा।

मैं तो कई बार खा चुकी हूँ, आज इसे खिलाना है। बेचारी बहुत दिनों से परेशान है। जिमी ने मेरी तरफ इशारा किया।

वो मेरी तरफ मुड़ा तो मेरा दिल जोर से धड़का। उसका लंड अभी हल्की उत्तेजना में था लेकिन आकार देखकर लगा ये आदमी है या गधा।

ये हर परेशानी की दवा है मैडम! उसने लंड हिलाते हुए कहा।

हूँ… पहले ही काफी देर हो चुकी है, काम पर लग जाओ! जिमी ने उसे मेरी तरफ धकेला।

बाबूलाल मेरे पैरों पर औंधे मुंह गिरा। जिमी हंसती हुई पास आई। उसने मेरी चूत देखी और बोला—अरे बाप रे… इसमें से तो भाप निकल रही है मैडम!

क्या मतलब? जिमी ने पैर से उसका सिर ऊपर उठाया।

मतलब साफ है, इसकी गर्मी से मेरा लंड पिघल जाएगा। वो हाथ झाड़ता हुआ खड़ा हुआ।

मैंने झुककर अपनी चूत देखी, मुझे कहीं भाप नहीं दिखी।

क्या बक रहा है तू? जिमी गुस्से में। उसने बाबूलाल का लंड पकड़कर जोर से झटका मारा। बाबूलाल दर्द से तड़प उठा—मईया रे मैं तो जा रहा हूँ!

वो कपड़े उठाने लगा।

मैं तड़प उठी—हाय क्यों झगड़ा कर रही हो? वो जा रहा है!

अरे मैं नहीं, वो खुद झगड़ा कर रहा है। अगर भाप निकल रही है तो डरने की क्या बात? जिमी बोली।

ज़रा ऊँगली डालकर देखो, पता चल जाएगा। बाबूलाल बोला।

ठीक है, फैसला अभी हो जाता है! जिमी ने दांत भींचे—अगर तू भागा तो मूंछें उखाड़कर तेरे पीछे घुसेड़ दूँगी!

वो कमरे में गई और थर्मामीटर लेकर आई। मुझे बैठाया, जांघें फैलाईं और थर्मामीटर मेरी चूत में आधा फंसा दिया। बाबूलाल आँखें फाड़े देख रहा था। अचानक थर्मामीटर बाहर उछला और टूट गया। हम तीनों हैरान।

देख क्या हाल हुआ! यही हाल मेरा होने वाला था! बाबूलाल ने अपने लंड की तरफ इशारा किया।

ओह्ह… अब मेरा क्या होगा जिमी? मैं तो आज बड़ी उम्मीद लेकर आई थी! मैं तड़पकर बोली।

मैंने पहले ही कहा था ये पागल कुतिया की तरह लार टपका रही है। जिमी बोली।

अब क्या करूँ? कुछ सोच, नहीं तो रो पड़ूँगी!

नहीं… वो मेरे कंधे पर हाथ रखकर बोली—आज तेरे आंसू निकालने हैं।

उसने बाबूलाल से कहा—क्या बोलता है?

एक गांधी का नोट और लगेगा मैडम! बाबूलाल बोला।

जिमी गुस्से में थी। मैंने कहा—तुम पैसे दे दो।

ठीक है, आज एक-एक पैसे का हिसाब लूँगी। जिमी ने पर्स से पैसे निकालकर दिए।

बाबूलाल मेरी जांघों के नीचे बैठा। उसने कुत्ते की तरह चूत सूंघी और लंबी जीभ निकालकर चाटने लगा। स्पर्श बहुत उत्तेजक था। मैं मछली की तरह तड़पने लगी।

जिमी पास बैठी, मेरी चूचियाँ दबाने और गाल-होंठ चूमने लगी। मैं उड़ने लगी। पूरा बदन झनझना उठा। बाबूलाल चूत फैलाकर चाट रहा था। जिमी ने मेरी चूचियाँ रगड़ीं और निप्पल चूसे।

मैं मस्ती में खो गई। नाम-पता सब भूल गई। मीठी गुदगुदी पूरे बदन में।

मैंने भी जिमी की चूचियाँ रगड़ीं। उसने तड़पकर मेरे होंठ छोड़े और डंडा हिलाने लगी। आधा डंडा उसकी चूत में घुस गया। वो जोर-जोर से हिला रही थी।

सीई… क्या कर रही है पागल, डंडा टूट जाएगा! मैंने कहा।

हाँ छोड़ दे, आज इसे तोड़कर ही दम लूँगी! उसने कहा।

वासना का नंगा नाच शुरू हो चुका था। बाबूलाल ने मेरी चूत से बहुत रस निकाला। अब मुझे ठंडक महसूस हो रही थी।

मैं चूत चटवाने से ऊब गई। बाबूलाल को हटाया। वो खड़ा हुआ तो उसका चेहरा चिपचिपा था। मूंछें चूत के रस से भीगी अकड़ गई थीं।

अब इसका भी ख्याल कर लो! वो लंड हिलाते हुए बोला।

इसे कौन छोड़ने वाला है! जिमी कूदकर आई। उसने मुझे इशारे से बुलाया। हम दोनों पास बैठे और बाबूलाल का लंड बारी-बारी चूसने लगे।

मैं उसे मुँह में दबाकर भूल जाती कि छोड़ना भी है। जिमी जबरदस्ती खींचती। पुच्च… पुच्च… की आवाज पूरे कमरे में गूँज रही थी। बाबूलाल भी खुलकर मजा ले रहा था।

दस मिनट बाद वो बोला—बस करो मैडम, अब छोड़ दो, रहम करो।

मैं भी चाहती थी कि चुदाई जल्द शुरू हो।

मैंने फर्श पर हथेलियाँ टिकाई और घुटनों के बल झुक गई। बाबूलाल मेरी गांड के पीछे आया। लंड के सुपारे को चूत और गांड पर रगड़ा। चिकना लंड था। चूत पर रगड़ने से मेरा रस निकलने लगा।

उसने एक झटका मारा। सुपारा चूत में फंस गया। मैं उछल पड़ी।

भैया, धीरे पेलो! ये जिमी की मशीन नहीं, तीन साल से बंद है। पहले ढीला कर लो। मैं कराहते हुए बोली।

मैडम जी, आपकी सहेली मुझे भैया कह रही है? बाबूलाल लंड पेलते हुए बोला।

भैया कह रही है तो बन जा इसका सैंया! इसकी चूत में ऐसा लंड पेल कि चुदवाना भूल जाए। साली को बहुत खुजली है! मिटा दे। जिमी ने उसे और जोश दिया।

अब बाबूलाल बंदर की तरह उछलने लगा। उसका लंड मेरी चूत की गहराई में उतरकर ऐसी-तैसी कर रहा था। मजा इतना आ रहा था कि बयाँ नहीं कर सकती। मेरे साथ चूचियाँ भी हवा में झूल रही थीं।

मुँह से निकल रहा था—हूँ… सा… आ… बाश… बाबूलाल… सी… ई… बस… मुझे ऐसे झूले की तलाश थी!

बाबूलाल भी पागल था। उसने मेरे एक-एक पुर्जे खोल दिए। वो हाँफता हुआ मुझे झुला रहा था। जिमी सामने बैठी डंडा हिला रही थी। अचानक वो उठी और बाबूलाल के पीछे गई।

ठहर जा बेटा! उसने ढेर सारा थूक डंडे पर लगाया और बाबूलाल की गांड में घुसा दिया—मैं भी तेरी ऐसी-तैसी करती हूँ साले!

आ… आई… मार दिया बेचारे को साली! बाबूलाल चीखा।

यह तमाशा सारी रात चलता रहा।

पता नहीं उस बूढ़े में क्या जादू है। हर रात मैं उसके पास खिंची चली आती हूँ। जिमी भी साथ होती है। अब मेरी जिंदगी बड़े आराम से चुदवाते हुए गुजर रही है।

Kahani padhne ke baad apne vichar comments mein zaroor likhein – Amit Singh

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