कोठे की कुतिया से आगे।
मैं और रिया मौसी के साथ पारदर्शी मैक्सी में ऊपर गए। मोंटी अंकल इंतजार कर रहे। मौसी बोली—डार्लिंग, मस्त लौंडिया लाई हूँ। छूते ही मस्ती में डूब जाओगे।
मैंने अंकल के पास जाकर लंड रगड़ा। मैक्सी उतारी।
अंकल बोले—समझदार है।
मेरी चूत पर हाथ फेरा—साली की पाव रोटी चकाचक है। ज्यादा चुदी नहीं लगती।
मौसी बोली—ताजा माल है। पीछे कुंवारी, आगे भी लंड छुआ नहीं। आज भोंसड़ा बनाना है।
अंकल ने लंड निकाला। मैंने मुँह में लिया। चूसने लगी। मेरी चूत पगला रही थी।
मौसी बोली—अंकल जैसे कहें वैसा करना। खुश नहीं हुए तो भोंसड़ी बनाऊँगी। चेहरा बिगाड़ दूँगी।
मौसी मोनी को लेकर गई।
अंकल का लंड सुंदर। आठ इंच। मोटा।
मैं चूस रही थी। अंकल बोले—थोड़ा चूत चुसवा।
69 किया। अंकल चूत चूस रहे। मैं लंड।
फिर मुझे लिटाया। लंड चूत पर। झटका। पूरा अंदर।
मैं चीखी—उई… मर गई! छोड़ो!
अंकल ने चूचियाँ दबाईं। चुदाई शुरू। दर्द के बाद मजा।
मैं चिल्लाई—चोदो… बहुत मजा आ रहा है!
अंकल माहिर। धीरे-तेज। चूचियाँ मसले। होंठ काटे।
गांड हिला… मजा आएगा।
मैं हिलाने लगी। मजा दुगना।
तिरछा किया। टांग उठाई। पीछे से चोदा।
मैं चरम पर। चूत से पानी। अंकल ने झाड़ दिया।
मैं मस्त लेट गई। अंकल ने ब्लू फिल्म लगाई। दारू बनाई।
मुझे गोद में बिठाया। लंड चूत में। दारू पीते हुए धक्के।
शीशे में देखा। नंगी। लंड अंदर।
मैंने उछल-उछल कर चुदाई की।
रात तीन बजे गांड मारी। क्रीम लगाई। पूरा घुसाया। चीखी।
मौसी शोभा लेकर आई। आगे भाग 2 में।
Kahani padhne ke baad apne vichar comments mein zaroor likhein – Manish Yadav