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Hindi Sex Stories – हिंदी सेक्स कहानियाँ

कोठे पर कुतिया बनकर चुद गई - भाग 2


पहले भाग से आगे।

अंकल सोफे पर बैठे। मौसी ने मेरी चूत पर हाथ फेरा। बोली—मुनिया चमक रही है। उठ, धंधा कर। जब तक सूज नहीं जाएगी तब तक चुद।

मैं उठी। जानी पलंग पर। मौसी बोली—ये जानी विदेशी सामान का सौदा करता है।

ग्लास बनाए। जानी का चूसा। मौसी ने इशारा किया। मोंटी ने पीछे से चूत में डाला। मैं जानी का चूस रही थी।

जानी ने गांड मारी। मोंटी ने चूत। दोनों ने साथ चोदा। मैं चिल्ला रही थी। मौसी तालियाँ बजा रही—चोद साली को! याद रखेगी कोठे पर चुदाई!

दोनों ने चूत में पानी छोड़ा। मैं लेट गई। चूत-गांड दर्द में।

रात चार बजे। मौसी, जानी, मोंटी दारू पीने लगे। जानी बोला—साली की चूत सुंदर है। सूजी तो और सुंदर। चुम्मा लेकर आता हूँ।

जानी ने चूत पर चुम्मा लिया। मोंटी ने भी। 10-12 बार चुम्मे।

मौसी ने घंटी बजाई। राजू आया। मौसी ने शोभा से कहा—नंगी हो।

शोभा नंगी। मौसी बोली—इसकी गाड़ी चलाओ।

राजू सोफे पर। शोभा लंड पर बैठी। पूरा अंदर। राजू उछलकर चोदने लगा। भूरा ने गांड में डाला।

टीनू ने मुँह में। कालू का लंड हाथ में। चारों से शोभा खेल रही थी।

जानी ने मुझे लंड पर बिठाया। अंकल ने हाथ में लंड दिया। मैं मसल रही थी।

अंकल ने बाल खींचे—भोसड़ी की, नींद आ रही है? अभी इस रांड की जगह बिठाता हूँ। लंड चूस।

मुँह में ठूँस दिया। शोभा की गाड़ी तेज। गुंडे जगह बदलते।

अंकल-जानी ने मेरे मुँह में झाड़ा। नशे में कोठे से गए।

सुबह पाँच। मौसी ने राजू से कहा—मैं सोने जा रही। कालू को बुला। जितना मन हो चोदो। नीचे कमरे में।

राजू मुझे गोद में लेकर नीचे ले गया। कालू आया। राजू ने गांड में, कालू ने चूत में। सुबह सात तक नोचा-चोदा। फिर सो गई।

अगले दिन रात नौ बजे मौसी ने चूतड़ पर थप्पड़ मारा—रंडी रानी, उठ!

मैं उठी। मौसी बोली—कपड़े पहन। खाना खा।

मैंने कहा—मौसी, वापस भेज दो।

वो मुस्कुराई—अभी चल नहीं पा रही। चूत सूजी है। ठीक हो जा।

खाना खाया। सो गई।

सुबह दस बजे मौसी आई। छोटा खलील साथ। बोली—बॉम्बे नहीं जाना? ये खलील जा रहा। गाड़ी में चल। चंपा बार में नचवाएगा। नाचना-धंधा करना। 5 लाख में बेच दिया।

खलील बोला—मौसी, दो घंटे चोद लूँ?

मौसी—दस घंटे चोद। मोंटी ने कल दोनों छेद सुजा दिए।

खलील ने दो बार चूत, दो बार गांड मारी। बोला—मौसी ने एक दिन में भोंसड़ा बना दिया।

बारह बजे तक अधमरा किया। गाड़ी में बाँधकर मुंबई ले गया।

चंपा बार में नाचती। रात भर चुदती।

चार दिन बाद खंडाला जा रहे थे। रास्ते में दारू। लड़कियों से लंड चुसवाए। दूसरी पार्टी आई। गोलीबारी। खलील मरा। मैं छुप गई। दूसरी लड़की को ले गए। मैं बस से गाँव लौटी।

अब खुशहाल जिंदगी।

धंधे से नफरत करो, धंधे वाली से नहीं।

Kahani padhne ke baad apne vichar comments mein zaroor likhein – Vikram Rathore

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