यह कहानी मेरे एक दोस्त ने भेजी है। नाम नहीं बताना चाहते। उनके शब्दों में ही कहानी लिखी है।
यह मेरी सच्ची कहानी है। अंतर्वासना पर हिम्मत करके अपनी आपबीती बता रहा हूँ।
मेरे जीजू और दीदी दिल्ली में रहते हैं। मैं कुछ दिन उनके साथ रहने गया था। दीदी जयपुर बड़ी दीदी की सेवा करने गई थीं। मुझे बताया कि घर के काम में मदद करनी है। तीन-चार दिन में वापस आएँगी। हिदायत दी—देखो जाना मत, तुमसे काम है। कुछ इशारा भी किया।
दो-तीन दिन सामान्य रहे। तीसरे दिन जीजू ने दो सिनेमा टिकट लिए। शाम को हम हॉल गए। भीड़ कम। पीछे की सीट पर बैठे। पास की सीटें खाली।
पिक्चर शुरू हुई। थोड़ी देर बाद जीजू का हाथ मेरी जांघ पर। झनझनाहट हुई। मैंने हटा दिया। फिर आ गया। धीरे-धीरे लंड की तरफ। मजा आने लगा। मैंने रोका।
जीजू बोले—बाबू, कुछ ठंडा लोगे?
बिना सुने कोल्ड ड्रिंक लाए। फिर पिक्चर देखने लगे। जीजू ने फिर हाथ रखा। लंड दबाया। मेरा खड़ा होने लगा।
जीजू, हाथ हटा दो, अजीब लग रहा है।
अरे मस्ती ले, मेरा भी पकड़, मुझे भी मजा आएगा।
उन्होंने लंड ठीक से थामा। सहलाया। मेरी उत्तेजना बढ़ी। मैंने भी उनके लंड पर हाथ रखा। पहले से खड़ा था।
दो सीट उधर हो जा।
समझ गया, पास वाले को डर था। इंटरवल हो गया। समय जल्दी निकल गया।
घर आए। डिनर लिया। रात को जीजू बोले—अकेले क्या सो रहे हो, इधर आ जाओ, बातें करेंगे।
मैं उनके कमरे में सोने चला गया। बातें कीं।
जीजू, दीदी से मत कहना।
अरे तुम्हारी दीदी ही तो कहती रहती है कि बाबू का लंड छोटेपन से बड़ा-मोटा है।
अच्छा? और क्या कहती थी?
कहती थी अगर चाहो तो भैया को मुझे चोदने के लिए राजी कर लो।
क्या? दीदी ने कहा ये?
कल आएगी तो देख लेना।
दीदी के विचार सुनकर लंड तन्ना गया। दीदी का फिगर याद आया। चूत कैसी होगी? चूचे कैसे?
कब सो गए पता नहीं। रात में जीजू मेरी पीठ से चिपके। लंड मेरी गांड में रगड़ रहे। हाथ से मेरा लंड पकड़ा। मैं अनजान बना रहा। मजा आने लगा।
जीजू ने समझा मैं सो रहा हूँ। पजामा उतारा। गांड नंगी। लंड बाहर। जीजू ने थूक लगाया। सुपारा गांड में गड़ने लगा।
जीजू, मेरी गांड मारोगे?
प्लीज मारने दे… फिर तू भी मार लेना।
मेरा लंड कठोर।
जीजू, पहले मुझे आपकी गांड मारने दो।
वो खुश। घोड़ी बने। गोल चिकनी गांड। मैंने चूतड़ चीरे। जीभ से चाटा। अंदर डाली।
जीजू बोले—बाबू तू उस्ताद है… अब लंड घुसेड़ दे!
मैंने लंड जमाया। एक धक्का। पूरा अंदर। चूतड़ थपथपाए। वो मस्त। लंड कसकर पकड़ा। मुठ मारने लगा।
जीजू तड़पे—भेनचोद… मस्त गाण्ड मारी…!
दीदी को मेरे से चुदवा दो।
कल ही लो। वो आए तो खुद चिपक जाना। गले लगाएगी। बिना कहे चुदवा लेगी।
जीजू का लंड मसलने से वो झड़ने को। मैं भी चरम पर। मैंने झाड़ दिया। जीजू ने पलटा। मुझे घोड़ी बनाया।
दो मिनट… मैं तैयार हूँ।
लंड मेरी गांड में। दर्द से कराहा। तीन-चार धक्के। वो झड़ गए। वीर्य से गांड चिकनी।
साली गांड है या सुई का छेद। बार-बार चोदकर लायक बनाना पड़ेगा।
अगले दिन दीदी आई। उन्हें देख हिम्मत नहीं हुई।
शाम को दीदी नहाकर पेटीकोट में आई। पतला कपड़ा। पेंटी नहीं। मैं बिस्तर पर बैठा।
दीदी बोली—जीजू बता रहे थे तुम दोनों ने खूब मजे किए।
जी, जीजू मस्त हैं। आपको कैसे मालूम?
उन्होंने सब बता दिया।
दीदी पास आई। चूत मेरे मुँह के पास। मैंने चूतड़ दबाए। पेटीकोट पर चूत में मुँह गड़ाया। दीदी सिसकारी।
मेरे बाल नोचकर दबाया। पेटीकोट ऊँचा किया। चूत डबल रोटी सी। बाल नहीं। रस बह रहा।
भैया… चूस डाल चूत को…
मैंने जीभ डाली। वो चूतड़ उछाल रही थी।
मैंने पेटीकोट उतारा। वो नंगी। टांग फैलाई। चूत खोली। जीभ से चाटा।
दीदी कराह रही थी।
जीजू और आप?
ये तो बस गांड मारते-मराते हैं। गे हैं।
दीदी, निराश मत हो। मेरा लंड आपकी प्यास बुझाएगा।
वो खुश। मुझसे लिपट गई।
मैंने पेटीकोट उतारा। वो बिस्तर पर। मैं नंगा। लंड दिखाया।
ला चूस लूँ… लंड मुंह में। चूसने लगी।
मैंने कमर हिलाई। गला चोदा। वो खाँसी।
गले को चोद डालेगा?
सॉरी दीदी… जोश में…
वो लेटी। टांगें ऊपर। चूत खोली। मैंने लंड जमाया। धक्का। पूरा अंदर।
दीदी ने कसकर पकड़ा।
मेरी बड़ी-बड़ी चूचियाँ मसल डालो…
मैंने चूचियाँ मसलीं। वो कमर हिलाने लगी।
जीजू बोले—बाबू, तबियत से चोदना।
मैंने दीदी को चोदा। जीजू ने मेरी गांड में लंड डाला। दर्द से कराहा।
सह ले भैया… मैं भी तो चुद रही हूँ… डबल मजा ले।
जीजू झड़े। मैंने दीदी को जोर से चोदा। दोनों झड़े।
दीदी बोली—तेरा लंड तगड़ा है। तीन बार झड़ गई।
जीजू की वजह से मेरा माल रुका था।
उस दिन से दीदी मेरी चुदाई की फैन। जीजू से चुदना छोड़ दिया।
सात दिन गांड नहीं मरवाई। फिर रोज रात मैं दीदी को चोदता। जीजू मेरी गांड मारते। दिन में जीजू कई बार गांड मरवा लेते।
अब हमारी लाइफ मस्त चल रही है… या गड़बड़।
Kahani padhne ke baad apne vichar comments mein zaroor likhein – Arjun Mehta