मैंने पिछले भाग में अपनी एक जबरदस्त चुदाई की पूरी घटना सबके सामने रखी थी, यकीन है सभी को मजा आया होगा। साथियों, जैसा कि मैंने पहले बयान किया था कि मेरी धारणा कुछ अलग तरह की है, कौन जाने आगे का जन्म कब मिले, इसलिए मैं अपनी ताजा जवानी को बेपरवाह होकर लूट लेना चाहती हूं। मुझे बेहद अच्छा लगता जब युवक मुझे सामान, घुमक्कड़, शरारती लड़की जैसे शब्दों से नवाजते हैं, इससे मुझे कोई तकलीफ नहीं होती बल्कि आनंद मिलता है। यहां तक कि उनकी तानों पर धन्यवाद बोल देती हूं जिससे वे लज्जित हो जाते हैं।
मैंने वर्णन किया था कि कैसे एक ट्रक मालिक के बेटे गोपाल के साथ मेरा संबंध चला और उसके साथ चुदाई के भरपूर सुख उठाए थे तथा उसके चले जाने पर जो नया लड़का रोहन मेरे संपर्क में आया वह तो स्पष्ट मेरे धन के लालच में था यह मुझे पूरी तरह मालूम था, समझ में आता था, यही कारण था कि वह मेरे शानदार शयनकक्ष में मुझे संभालना चाहता था। और यह स्वार्थ मैं शुरूआत से ही भांप चुकी थी।
खैर मेरे सिर पर कामुकता का नशा चढ़ा हुआ था, जब उसने अपने चचेरे भाई को साथ लाने का जिक्र ही कर दिया तो मैंने रोहन को पिछवाड़े के द्वार से अंदर लिया और सीधे अपने बिस्तर तक ले आई। उसने बताया कि उसका चचेरा भाई समीर बाहर ही इंतजार कर रहा है, वह उसे जयपुर के एक पब में बिठाकर आया है। यह सुनकर मुझे कुछ निश्चिंतता हुई कि केवल एक ही है।
आज उसे अकेले बिस्तर पर पड़ी देख उसकी आंखों में मदहोशी छा गई। मैं बेड पर विराज गई। उसने जूते उतारे और मेरे बाजू में लेट गया। उसके बगल में लेटे देख मेरा दिल भी घबराने लगा। उसने मेरी टी-शर्ट खींच ली उसके ठीक सामने मेरे दो उभरे हुए चूचे सीधे निप्पलों संग नजर आए जिससे उसका लंड तन गया। उसने दोनों स्तनों को बारी-बारी चाटा चूसा और मुझे विकल बना दिया। मैं तो पहले से ही केवल पैंटी में थी, मेरी सफेद रंगत वाली जांघों पर उसके हथेलियां फेरने लगीं।
मैंने उसकी जींस खोल दी और उसका लंड अंडरवियर फाड़ने को आतुर दिखा। कच्छे को उतारते ही सामने काला सांप जैसा लंबा लंड प्रकट हुआ। वाह! क्या शानदार हथियार हासिल किया है तूने दुष्ट!
रंडी पसंद आई?
मैंने उत्तर दिया- हां बहुत ही पसंद आया!
अब चाटेगी भी कुतिया अपने कुत्ते का लंड?
मैंने तुरंत मुंह में ले लिया और पागलपन की तरह चूसने लगी। एक सच्ची वेश्या जैसी लगने लगी।
शाबाश रानी शाबाश! उसने मेरी टांगें फैलाईं और अपने होंठ मेरी भगवा पर सटा दिए, जैसे ही छुआ मैं भड़क उठी और मन किया कि यूं ही चाटता रहे। मेरे नितंब उछलने लगे- आह आह!
उसने दोनों पैर कंधों पर रखे और लंड भगवा द्वार पर साधा। मैंने हाथ से लंड को छेद पर लगाते हुए झटके की गुजारिश की।
आउच! ओह आह! उसका मोटा लंबा लंड अंदर सरकने लगा। दर्द का भी क्या स्वाद आया!
करते-करते एक जबरदस्त धक्के से पूरा अंदर ठूंस दिया। मैंने हिम्मत जुटाकर बेडशीट पकड़ी दांत पीसे और सह ली तथा उसका पूरा साथ देने लगी।
बहुत शानदार तरीके से चोद रहा था, मैं भी अपनी चूत उछाल-उछाल कर उसका जोश बढ़ा रही थी। जब पूरा लंड अंदर जाता तो गर्भ तक ठोकर मारता और आनंद से आंखें बंद हो जातीं।
फिर उसने मुझे खड़ा कर दीवार से टेक झुकाया और लंड अंदर डाला, कस-कस का मजा आने लगा, और चोदो! और रगड़ो!
ले रंडी, हरामी कुतिया! साली वेश्या यह ले!
वहीं ऊंटनी बना लिया और पेलने लगा। नीचे से मेरे दोनों चुचे लहराने लगे उसने पकड़ लिये और रफ्तार पकड़ मशीन की भांति दौड़ने लगा।
फिर अचानक उठाया लंड अंदर ही रख गोद में भर बिस्तर पर पटका मेरे ऊपर चढ़ गया और अंत में सारा रस मेरी चूत में उंडेल गिर पड़ा।
उसने मुझे इतना तृप्त किया कि मैं प्रसन्न हो गई। उसके बाद बोला- अब कब बुलाओगी?
मैंने कहा- अपने चचेरे भाई को भी साथ लाओ! बेचारा!
क्योंकि अब मेरा मन दोनों के एक साथ लंड डलवाने का हो चुका था।
वो बोला- दस मिनट में हाजिर!
उसके बाद क्या हुआ, जानने के लिए इसका तीसरा भाग पढ़ें।
Kahani padhne ke baad apne vichar comments mein zaroor likhein – Rahul Sharma