रोजाना की भांति मैं और प्रिया अपने कार्यालय में विराजे कार्य कर रहे थे। प्रिया हमेशा अल्प वस्त्रों से मुझे उत्तेजित करने की चेष्टा करती। उसे देख भड़कता और चुद जाता पर अब अनुचित समय चुदाई में रस नहीं। लेकिन आज ताऊजी का फोन आया कि राहुल और नेहा पॉन्डिचेरी घूमने आ रहे। प्रिया राहुल को न जानती। सूचना से प्रसन्नता हुई।
समय पर कार लेकर प्रिया संग रेल स्टेशन पहुंचे। ट्रेन आ चुकी। मोबाइल पर नेहा को बताया हम बाहर प्रतीक्षा में। तत्काल एक अत्यंत सुंदर कन्या और हीरो टाइप युवक दिखे। अनुमान सटीक नेहा व राहुल। पहले बाहर खड़े इधर उधर देखे। प्रिया बोली शायद वही लड़का शानदार।
तुझे तो बस लंड दिखता जा पता कर। प्रिया उतरी सीधे युवक के पास। राहुल स्तब्ध। कौन सुंदरी? मैं उतरा देखा बातें नेहा ने हाथ लहराया। आते ही औपचारिक चुम्बन पर शरारतपूर्ण चुचियां छाती से रगड़ी सिहरन। नेहा शरारती कजिन समझ आया। राहुल प्रिया पीछे नेहा आगे। मजा आएगा लगा।
घर पहुंच शाम घूमने प्लान। प्रिया ने राहुल से मैत्री कर ली। राहुल प्रसन्न। नेहा अनौपचारिक खुलकर बातें मेरे प्रिया संबंध पूछे। खुलासा दोस्त है साथ रहती कोई बुराई नहीं। नेहा खुश शायद यात्रा रोमांचक बनाना चाहती। लंच 후 आराम। प्रिया सोफिया बातें मन टोह।
शाम समुद्र तट प्रोग्राम छह बजे चारों रवाना। रास्ते दो-दो पेग काजू फेनी फिश चिकन लिया।
तुरंत पॉन्डिचेरी बीच पहुंचे। लंबा तट पर्यटक। चादर बिछाई। प्रिया ब्रा पैंटी में दौड़ी राहुल अंडरवियर में पीछे।
नेहा बोली आप न चलेंगे?
साथ चलेंगी?
मुझे शर्म आती प्रिया जैसे वस्त्रों में।
मुझे नहीं देखो। सारे वस्त्र उतारे अंडरवियर में लंड उभार साफ। नेहा निहारी उत्तेजित।
तुम उधर मुंह करो मैं उतारती। शरमाते उतारा गोरा बदन चमका। ब्रा से चुचियां बाहर उमंगीं। मन डगमगाया लंड कड़ा।
छोटी पैंटी चूतड़ गोलाई जान ले रही। पतली कमर उभरे कूल्हे चिकनी जांघें मदहोश। बाहें उठी आलिंगन को नेहा समा गई। नंगे बदन छूए आग लगी। नेहा ओठ गर्दन रगड़े चूतड़ दबा लंड स्पर्श। दरी पर लेट लिपट लोटे रेत पर पहुंचे। हाथ ब्रा ऊपर चुची दबी नेहा सिसकी। दूसरी लोट नेहा ऊपर बेतहाशा चूमी। चूत पर कठोर लगा। देर आनंद प्यार।
बस करो समुद्र तट है कमरा नहीं। प्रिया हंसी। भूले समय वे लौटे। नेहा होश में राहुल उत्तेजित प्रिया दबोची गीली पैंटी उतारी। प्रिया बेशर्म राहुल लंड पकड़ा। वे दरी पर चोदने कोशिश। नेहा हटी मैं उठा खींचा अलग।
यहां नहीं चलो गश्ती जीप।
घर चलो सार्वजनिक स्थल। नेहा समझाया प्रिया रेत साफ। देखा पर्यटक गए गश्ती रोशनी। कपड़े पहने कार में जीप रुकी ओह साहब गुड इवनिंग।
गोआ में रिश्तेदार घुमाते रहो।
हां सजा है हंसता गया।
रेत से निकल कार मडगांव रवाना।
घर पोर्ट वाइन पेग सोफे सिप। प्रिया राहुल शरारतें। चुपके मेरी नजरें देख रही। नेहा चोरी देखा हाथ दबाया अप्रत्याशित खींचा।
क्या?
हाथ हटाओ।
तट पर तो...
वहां मोहित हो गई सॉरी। नेहा चली निराश देखा। प्रिया समझी तुरंत पास।
मैं हूं अधिक सुंदर मजा दूंगी। राहुल आया।
दीदी समझाता।
दिल के सौदे तुम मस्ती करो। उठा।
चलो प्रिया अंदर। राहुल हाथ पकड़ा प्रिया गुस्से मैं जो के साथ।
प्रिया प्लीज राहुल खुश करो। कमरे चला।
बैचेनी कई लड़कियां चोदी नेहा न मिली बुरा न लगा। भूल नींद। रात्रि आहट बत्ती नेहा।
बुरा लगा माफ करो। नींद में हंसी।
नहीं फीलिंग्स का ध्यान रखना चाहिए।
बीच मोहित भावनाएं जागीं।
मेरे साथ भी पर भूल जाओ।
कैसे विक्की प्रिया मौज मैं अभागी माहवारी। बिस्तर बैठ बाल खेले।
ऐसे समय असमंजस। चेहरा ओठ नरम होंठ चूमे व्हिस्की भभका होश में। आंखें बंद अधरपान। कमर पकड़ लिपटाया विरोध न ऊपर लेट चूत लंड पर नेपकिन अहसास डर।
बैचेनी हाथ स्तनों पर साधारण साइज निप्पल कठोर बड़े। सहलाया गुदगुदाया सिसकारियां।
बगल लेट प्यार देख निप्पल मल आनंद। नजर दबाई इशारा चड्डी लंड दबाया। अजीब चूत पट्टा मन चुदने का। पजामा सफेद पट्टा। लंड दबा सहलाया छोटी चड्डी न समाया साइड निकाला मुठ रगड़ा। निप्पल उभार सहलाए सिसकारियां। लंड फूला नेहा आंखें गुलाबी।
सहन खोया चूत दबाई सिमटी सिसकारी झड़ी आंखें बंद आनंद। सहलाया जारी सामान्य हाथ कस सुरसुराहट। लिपटाया प्यार।
मुठ से कड़ा चूतड़ हिले सहायता उफनता रस हाथों में। हाथ वीर्य भरा चलता छलका लंड भरा हाथ भरा नाभि फैलाया गाल चूमा। पजामा नेपकिन उतारा मुख फेरा मुस्करी।
लंड छिपाओ नजर लगेगी। प्रिया हंसी नेपकिन उछाला।
दो बजे न सोए?
रात कौन सोए जो नेहा पटाई।
नेहा ने पटा मजबूरी सादगी अंदाज।
जो समझदार प्यार रजामंदी से।
प्रिया राहुल खुश ठीक। नेहा चूमा इठलाती चली प्रिया राहुल चली। सोचा माहवारी खत्म नेहा चोदूंगा सो निद्रा।
Kahani padhne ke baad apne vichar comments mein zaroor likhein – Amit Patel