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Hindi Sex Stories – हिंदी सेक्स कहानियाँ

एक दिन अचानक - बीवी की सहेली भाग 2


पहले भाग से आगे।

रागिनी, अब बहुत देर हो चुकी है। तुम भी जानती हो अब रुकना नामुमकिन है। इस मौके का फायदा उठाओ और मजा लो। दोनों की भलाई इसी में है।

मैंने उसे पकड़ा। पेटीकोट का नाड़ा खींचा।

पेटीकोट नीचे खिसका। उसने गांड उठाकर पेटीकोट निकाला। उफ्फ… भरे-गदराए चूतड़। पतली कमर पर टिके गोरे गोल चूतड़।

मैंने हाथ फेरा। पेटीकोट नीचे किया।

रागिनी ने पेंटी नहीं पहनी थी। मैं दंग। आँखें फटी। क्या चूत थी। दो केले जैसे जांघों के बीच गोरी चूत। एक बाल नहीं। 35 साल की औरत की चूत?

मेरी बीवी की चूत तो चुदवा-चुदवाकर काली हो गई। ये तो 20 साल की कुंवारी जैसी।

जैसा सोचा था उससे ज्यादा सेक्सी। वो शरमाकर चूत ढकने लगी। मैंने हाथ हटाए। चूत पर होंठ रख दिए।

वो सिहर उठी। ओह्ह… निकला। चूत से पानी बह रहा। जीभ अंदर डाली।

आह… संजय… मत करो… मर जाऊँगी…

मैं चूत फैलाकर फूँक मार रहा। जीभ से रस चूस रहा।

वो—हे भगवान… क्या हो रहा… पहले कभी नहीं हुआ…

चूत पर जीभ गोल-गोल। वो मेरे सर को दबा रही।

संजय… मत तड़पाओ… आह… उफ़… स्… स्…

मेरा लंड बरमूडा फाड़ रहा था। मैंने बरमूडा नीचे किया। लंड उछला। रागिनी के मुँह के सामने।

वो—बाप रे! कितना लंबा-मोटा! संगीता ने कभी नहीं कहा कि वो इतना मजा लेती है!

मैंने कहा—रानी, आज तुम भी मजा लो।

उसने लंड पकड़ा। सुपारे से घूँघट हटाया। ऊपर-नीचे किया। सुपारा फूला। लार टपक रही। लंड को आहिस्ता सहला रही।

मेरी तरफ देखकर मुस्कुराई। सुपारे पर चूम लिया। जीभ से चाटा। मुँह खोलकर अंदर लेने की कोशिश।

पूरे में नहीं गया। थूक से गीला किया। सुपारा अंदर।

मैंने सर पकड़कर धक्के लगाए। लंड हलक में।

मैंने बाहर निकाला। होंठ चूमे।

रागिनी… बेड पर चलो… जहाँ तुम संगीता को नंगी करके प्यार करते हो।

मैंने उसे गोद में उठाया। बेड पर पटका। वो लेट गई।

मैंने पैर फैलाए। तकिया नितंब के नीचे रखा। चूत ऊपर।

झुका। चूत पर होंठ। जीभ अंदर। स्लरप… स्लरप…

वो—ओह्ह… संजय… तुम सच में बहुत सेक्सी हो… संगीता किस्मत वाली है… आह… अब डाल दो…

मैंने पूछा—क्या डाल दूँ?

उसने कहा—मत सताओ… जल रही हूँ… तुम्हारा ये डाल दो मेरी वाली में।

मैंने तड़पाया। कहा—किसमें क्या डालना है? नाम बोलो।

उसने कहा—शर्म आती है… गंदी बात मत कहलवाओ।

मैंने दाने दबाया। चूत फड़की। ऊँगली अंदर। जी-स्पॉट कुरेदा।

वो चीखी—संजय… मार डालोगे क्या… करो ना…

मैंने कहा—जल्दी बोलो।

वो—अपना लंड मेरी चूत में डालो और चोदो मुझे!

मैंने लंड छेद पर रखा। दो-तीन बार रगड़ा। धक्का। सुपारा अंदर।

वो—उई… धीरे… बहुत मोटा है…

मैंने कमर पकड़ी। जोर से धक्का। पूरा अंदर। वो चीखी।

मैं रुका। दर्द कम होने दिया।

थोड़ी देर बाद वो—बहुत दर्द हुआ… लेकिन अब अच्छा लग रहा है।

मैंने होंठ चूमे। आहिस्ता-आहिस्ता अंदर-बाहर।

वो कराह रही—संजय… बहुत भीतर तक घुस गया… आह…

मैंने रफ्तार बढ़ाई। थप… थप… थपाक…

वो—जोर से… हाँ… आह… गई…

वो झड़ गई। चूत से पानी। मेरे लंड पर।

मैंने कहा—मेरा होने वाला है।

जोर से धक्का। जड़ तक। पिचकारी। चूत भर दी।

वो भी फिर झड़ी। हम चिपके रहे।

मैंने कहा—आई लव यू रागिनी। बहुत दिनों से तुम्हें पाना चाहता था।

वो—मैंने कभी नहीं सोचा था… लेकिन आज के बाद हमेशा तुम्हें पाना चाहूँगी। इतना मजा पहली बार मिला।

हम एक घंटा नंगे लेटे। वो बाथरूम गई। तैयार हुई।

संजय, ज्यादा वक्त हो गया। चलूँगी।

काश और रुकती।

मैंने कहा—संगीता दो हफ्ते बाद आएगी।

वो—अब घर पर नहीं। कहीं बाहर। तुमने जो हालत की है, दो-तीन दिन कुछ नहीं कर पाऊँगी। दर्द बहुत है।

वो लंगड़ाती गई। मैंने दरवाजा बंद किया।

दो दिन बाद फोन। बच्चे मामा के घर। पति टूर पर। ऑफिस से सीधे घर आ जाओ।

उस रात की कहानी अगले मेल में।

Kahani padhne ke baad apne vichar comments mein zaroor likhein – Karan Singh

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