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Hindi Sex Stories – हिंदी सेक्स कहानियाँ

एक दिन अचानक - बीवी की सहेली भाग 1


बिग बाजार में मेरी पत्नी की नजर एक खूबसूरत औरत पर पड़ी। उसने आवाज लगाई—रागिनी!

वो मुड़ी। मेरी पत्नी को देखकर चिल्लाई—हाय संगीता! कितने दिनों बाद मिली!

दोनों सहेलियाँ बातें करने लगीं। मैं रागिनी को देख रहा था। पलक झपकाना भूल गया। इतनी खूबसूरत। क्या फिगर।

काले सलवार सूट में। बदन के हर कटाव साफ दिख रहे। गोरे रंग पर काला ड्रेस। उभार साफ। नोकदार चूचियाँ। पतली कमर। उभरे नितंब।

संगीता ने कहा—ये रागिनी है, मेरी कॉलेज की दोस्त।

मैंने हेलो कहा। वो मुस्कुराई।

उसके रसीले गुलाबी होंठ। मानो कह रहे हों—आओ चूस लो।

पहली मुलाकात में ही मेरे लंड को चोदने की दावत दे दी। सोचने लगा—इसे कैसे चोदूँ।

मेरी बीवी भी सेक्सी है लेकिन रागिनी उससे ज्यादा। उसे बिस्तर पर नंगा करके चोदना सपना बन गया।

उस दिन दोनों ने साथ शॉपिंग की। उसके बाद भी अक्सर साथ घूमतीं।

रागिनी को नंगी करके चोदने का सपना सपना ही लग रहा था। वो बहुत शर्मीली। पुराने ख्यालों वाली। कोई गंदी बात नहीं। पति को बहुत प्यार करती। खुश है।

उसके लंबे बाल। अजंता मूर्ति जैसा बदन। चूचियाँ, चूतड़, जांघें। चेहरा गोरा, भरा हुआ।

बाद में पता चला दो बच्चे हैं। फिर भी 25 साल की लगती। उम्र 35।

उसकी पतली कमर, डोलते चूतड़। पीछे चलने वाले मर्द पैंट में झड़ जाते होंगे।

चूचियाँ 36 साइज। ब्लाउज में चिपकी। घाटी उत्तेजक।

वो मेरे लिए विस्फोटक औरत थी।

दिन बीतते गए। अचानक मेरी बीवी के पिताजी की तबीयत खराब। बेटे को लेकर बस से चली गई।

एक हफ्ता हो गया। मैं अकेला। मार्च में ऑफिस में काम। सुबह जल्दी जाना पड़ता।

एक सुबह चाय पी रहा था। घंटी बजी। इतनी सुबह कौन?

खिड़की से देखा—रागिनी।

दरवाजा खोला। वो मुस्कुराई।

गुड मॉर्निंग रागिनी।

हाय।

संगीता कहाँ है?

तुम्हें पता था वो अपने पिता के यहाँ गई है। पिताजी की तबीयत खराब है। इतनी सुबह कैसे आई?

वो अंदर आई। मैंने सोफे पर बिठाया। कॉफी लाया।

इतनी सुबह भी तुम बहुत खूबसूरत लग रही हो। मजाक में कहा—शायद मुझे कुछ हो जाए।

वो मुस्कुराई। कुछ नहीं बोली।

मैंने कहा—संगीता नहीं है तो एक बूढ़े को अकेला छोड़कर जा रही हो?

आप बूढ़े हो?

मैंने कहा—कभी-कभी लगता है।

वो घर घूमकर देखने लगी। मैंने दरवाजा बंद किया।

पहला मौका था हम अकेले बंद कमरे में। मैं उसके पास बैठ गया। घर की बातें कीं।

फिर मेरी बीवी की बात। शादी को 15 साल। अब बच्चे में व्यस्त। सेक्स उदासीन।

रागिनी ने कहा—फिर भी आप दोनों खुश हो।

मैंने कहा—संगीता भी खुश है।

फिर मैंने उससे पूछा—तुम्हारे परिवार के बारे में बताओ। पति खूब प्यार करते हैं?

वो उदास।

सब यही सोचते हैं कि हम खुश हैं।

क्या बात है? तुम दुखी लग रही हो।

नहीं… सब ठीक है।

नहीं, कुछ छुपा रही हो। मुझे नहीं बताओगी?

मैंने उसका हाथ पकड़ा। वो भावुक।

मैंने कहा—रागिनी, मैं कहना नहीं चाहता था लेकिन अब बिना कहे नहीं रहता। जिस दिन तुम्हें पहली बार देखा, उसी दिन से तुम्हें पाना चाहता हूँ।

वो हैरान।

क्या कह रहे हो? अगर संगीता ने सुना तो?

क्या तुम उसे बताओगी?

नहीं… लेकिन…

रागिनी, मैं तुमसे एक रिक्वेस्ट कर सकता हूँ?

क्या?

एक चुम्बन दोगी?

ये क्या कह रहे हो? मैंने कभी नहीं सोचा।

प्लीज… सिर्फ एक। भीख मांग रहा हूँ।

वो मुस्कुराई। ठीक है… सिर्फ एक। और किसी को पता नहीं चलेगा।

मैंने चेहरा बढ़ाया। गाल पर बाल हटाए। गाल पर पुच्च।

वो कसमसाई।

मैंने कहा—ये चुम्बन नहीं था। असली चुम्बन तो होंठों पर।

मैंने कंधे पर हाथ रखा। उसे खींचा। वो मेरी गोद में।

मैंने उसके हाथ पकड़े। होंठ उसके होंठों पर। हल्का चुम्बन।

वो सिहर उठी।

मैंने कहा—तुम जानती हो असली चुम्बन कैसे लिया जाता है।

वो शरमाई।

मैंने बांहें सहलाईं। कंधे दबाए। गाल पर कान के पास चूमा। जीभ से कान सहलाया।

साँसें तेज। वो कसमसाई।

मैंने साड़ी वक्ष से हटाई। वो विरोध कर रही थी।

नहीं संजय… प्लीज… किसी को पता चला तो?

मैंने हाथ उसकी चूची पर रखा। सहलाया। उसने हाथ दबाया।

बस संजय… इसके आगे नहीं… बदनाम हो जाएँगे।

मैंने बटन खोले। काली ब्रा। होंठ उसके स्तनों पर। गर्मी महसूस की।

ब्रा ऊपर। स्तन उभरे। चूमा। वो कराहने लगी।

चूचियाँ लाजवाब। सपनों वाली।

मैंने कहा—रागिनी, मैं तुमसे प्यार करता हूँ। आज मत रोकना।

वो चुप। सोफे पर पीछे झुकी। स्तन ऊपर।

मैंने ब्रा खोली। हाथ हटाए। गोरा बदन। चिकना।

मैंने कहा—मुझे इन्हें जी भर देखने दो।

गुलाबी निप्पल। मसला। वो—आउच…

मैंने उसे खींचा। कंधे पर सर। गाल चूमे। उँगलियाँ चूचियों पर।

साँसें तेज। आँचल जमीन पर।

संजय… कोई आ गया तो?

इतनी सुबह कोई नहीं आएगा। दरवाजा बंद है।

मैंने उसे बांहों में लिया। लंबा चुम्बन।

वो साथ देने लगी। धक्का देकर देखा। सेक्सी नजर।

गोरे उरोज। तने हुए निप्पल।

मैंने बनियान उतारी। उसके स्तन मेरे सीने पर।

वो—तुम बहुत बदमाश हो। गंदे।

मेरे सीने से लिपट गई।

मैंने चेहरा चूचियों पर रखा। निप्पल मुँह में। दूसरे को मसला।

वो—आह… बस… उफ… संजय…

मैं जोर से चूसने लगा। हल्का काटा।

ऊई… बस… अब नहीं…

मैंने कहा—मुझे मत रोको। सपनों की रानी को प्यार करने दो।

मैंने साड़ी निकाली। वो पेटीकोट में। कमर पर गदराया। गहरी नाभि।

नाभि पर हाथ। वो मचल उठी।

गाल चूमा। कान पर जीभ। वो उछली।

उसके निप्पल स्ट्रॉबेरी जैसे। लाल। कड़क।

मैंने चूची मुँह में ली। जोर से चूसा।

वो—आह… ओह… तुम बहुत बदमाश… उफ… दबाओ… चूसो…

उसने चूची मेरे मुँह में दी। जांघें रगड़ने लगी।

अचानक भींच लिया। आह… गई… पैर लंबे किए।

समझ गया। वो झड़ गई।

फिर होंठ चूमे। बगल में मुँह। मादक खुशबू। चाटा।

वो गुदगुदी से मचलती।

दस मिनट बगलें चाटीं।

फिर चूचियाँ। पूरा स्तन मुँह में। निप्पल चूसा।

चूचियाँ लाल। निशान। दांतों के निशान।

वो—आह… ओह…

पेट पर चूमा। वो उछली।

चूतड़ नीचे हाथ। सख्त लेकिन मुलायम। जीभ नाभि पर।

वो—संजय… बहुत बदमाश… उफ… नहीं… मर जाऊँगी…

वो उठी। मैंने होंठ चूमे। साथ दिया। जीभ अंदर। चूसी।

उसने सर पकड़ा। होंठ चूसे।

सोफे पर पैर लटकाकर बिठाया। मैं घुटनों पर। चूचियाँ सामने।

हथेली में भरी। निप्पल चूसे।

पेटीकोट गीला। मुँह नीचे। जांघें फैलाईं। उभार पर होंठ। पुच्च… पुच्च…

वो सिहर उठी। जांघें सिकोड़ी।

पेटीकोट की डोरी पर हाथ। उसने पकड़ा।

नहीं संजय… अपनी बीवी और मेरे पति को सोचो… गलत है…

मैंने कहा—अब रुकना नामुमकिन। मजा लो।

नाड़ा खींचा। पेटीकोट नीचे।

[शेष अगले भाग में]

Kahani padhne ke baad apne vichar comments mein zaroor likhein – Siddharth Patel

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