रिया मल्होत्रा ने जालंधर से मुझे अपनी पहली चुदाई की सच्ची घटना भेजी है। मैं उसे अपने लफ्ज़ों में संवारकर आपके सामने रख रही हूं।
मैंने बारहवीं कक्षा 74 प्रतिशत नंबरों से उतीर्ण कर ली थी, अब कॉलेज में पहले साल साइंस कोर्स में दाखिला ले चुकी थी। मेरा एडमिशन घर से दूर वही जगह मिल गया जहां जाना चाहती थी, कोवलम, केरल में। वहां मैंने एक किराए का फ्लैट ले लिया। पिताजी ने एक नौकरानी रख दी और वापस जालंधर लौट गए।
मेरे मकान मालिक का बेटा विक्रम था जो शुरू से ही मुझसे फ्लर्ट करता रहता था। वो मुझे भी भाता था, लेकिन ज्यादातर समय वो अपने कारोबार में व्यस्त रहता। कभी-कभी दुकान जाने से पहले वो मुझसे मिलने चले आता। लेकिन जल्द ही मेरा मन उससे उचट गया, क्योंकि वो ज्यादा पढ़ा-लिखा नहीं था। बारहवीं के बाद वो पारिवारिक धंधे में लग गया था।
मैं यहां बेहद प्रसन्न थी। बचपन से कोवलम की खूबसूरती के बारे में सुनती आ रही थी और अब अपनी पसंदीदा जगह पर पहुंच चुकी थी। अब तक तो मैं केवल लड़कियों वाले स्कूल में पढ़ी थी, लेकिन यहां सह-शिक्षा प्रणाली थी। क्लास में कुल आठ लड़कियां थीं। पंजाबी होने के कारण उनमें सबसे लंबी, सुंदर और आकर्षक फिगर वाली मैं ही थी।
कुछ ही दिनों में लड़के मुझ पर पटाने लगे। अपनी खूबसूरती के कारण मैं सबसे बेहतरीन को ही चुनना चाहती थी। एक लड़का जिसका नाम मैंने आर्यन रखा है, वो मुझे बेहद पसंद था। वो मेरी पसंद के मुताबिक लंबा, हंसमुख और मजबूत काया वाला था। मैं उसे हृतिक रोशन जैसा कहती थी।
मेरे स्तन छोटे थे, लेकिन ब्रा पहनने पर गोल और सुडौल दिखते थे। मेरा पतला-लंबा शरीर, नितंबों की उभार और उनकी गोलाई सामान्य थी। जब भी आर्यन मुझसे बात करता, मैं बातों में उसे उलझा देती और लंबे समय तक गपशप करती। आर्यन मन ही मन मुझे चाहने लगा था। खाली पीरियड में हम अक्सर कैंटीन में मिल जाते। आर्यन भी मेरी तरह 19 साल का था।
एक बार...
“रिया, लड़कों में तुम्हारा कोई खास दोस्त है?” आर्यन ने पूछा।
“अभी तक नहीं, मैं तो लड़कियों वाले स्कूल से हूं, सिर्फ लड़कियां ही मेरी सहेलियां रहीं!”
“मेरे साथ दोस्ती करोगी?”
“तुम्हारी तो कई लड़कियों से यारी है, कितनी से बातें करते हो!”
“नहीं, सिर्फ तुम ही मुझे अच्छी लगती हो।” बोलते ही वो शरमा गया, “सॉरी रिया... मेरा मतलब था कि..."
मेरी नजरें नीची हो गईं। मैं शर्म से लजाने लगी। आर्यन ने ये क्या कह दिया। मेरा दिल जोरों से धड़कने लगा।
“रिया, मेरा इरादा वो नहीं था... मैं तो दोस्ती की बात कर रहा था!” आर्यन घबरा गया। मैंने दोनों हाथों से चेहरा ढक लिया। मेरा मुंह लाल हो गया। किसी के मन की बात सामने आ रही थी। मैंने हिम्मत करके अपनी फीलिंग बता दी।
“आर्यन, मैं तो पहले से ही तुम्हारी दोस्त हूं, तुम भी मुझे बहुत भाते हो!” कांपती आवाज में मैंने बोल दिया। हाथ हटाते हुए मैंने कहा, मेरी आंखें शर्म से सुर्ख हो गईं। उसे घूरते हुए बोली, “सच बताऊं आर्यन, क्लास में तुम्हारा कोई सानी नहीं!”
“नहीं रिया, तुम जैसी कोई नहीं, तुम मुझे परी सी लगती हो!”
“तुम्हें पता है, तुम हृतिक रोशन जैसे लगते हो!”
समय कैसे बीता पता ही नहीं चला। अगला पीरियड हो गया। हम उठे और क्लास की ओर चल पड़े, “सुनो रिया, आज क्लास बंक करो, कहीं घूमने चलें!”
मैंने उसकी ओर देखा, वहां सिर्फ प्रेम भरा था। मैं मना न कर सकी। मैं उसके साथ ज्यादा से ज्यादा वक्त बिताना चाहती थी। उसने अपनी बाइक स्टार्ट की और शांत बीच की ओर चल पड़े। दिन का समय था, बीच लगभग सुनसान था। इधर-उधर थोड़े लोग दिख रहे थे। पेड़ों की छाया में पार्क के पास कई जोड़े पहले से बैठे थे। ये यहां का आम नजारा था।
हमने भी एक अलग कोना चुन लिया और कंक्रीट की बेंच पर बैठ गए। पास का जोड़ा किस में डूबा था, शायद लड़का लड़की के बूब्स से भी मजा ले रहा था।
आर्यन ने मुझे इशारा किया, “देखो, कितना प्यार कर रहे हैं दोनों!” मैंने भी उत्सुक नजरों से देखा।
आर्यन समझ गया था, प्यार की कोई भाषा नहीं होती। हमारे चेहरे करीब आने लगे। आंखें आपस में घुलने लगीं। दोनों की नजरों में अपार प्रेम था। मेरी आंखें बंद होने को हुईं। आर्यन के होंठ मेरे गालों को चूमने लगे। मेरा बदन सिहर उठा। होंठ कांपने लगे।
मैं असहाय लता सी उसकी गोद में लेट गई। मेरे कांपते होंठ उसके होंठों से दब गए। दिल की धड़कन तेज हो गई। उसकी जीभ मेरे मुंह में घुस आई। मेरे सीने पर उसके हाथों का स्पर्श हुआ। मैं बेहोश सी हो गई। मेरे होंठ ने भी उसकी जीभ को चूसा। अचानक हमारी खुमारी टूटी। सामने दो विदेशी महिलाएं खड़ी थीं, “एक्सक्यूज मी, क्या मैं आपकी फोटो ले लूं?”
“हां क्यों नहीं, थैंक्स” मैंने लिपटे रहते कहा।
“अब प्लीज, फिर से किस करो!” उन्होंने वही रोमांटिक पोज दोहराने को कहा। हम फिर उसी तरह चिपक गए और चूमने लगे। आर्यन मेरे बूब्स दबाने लगा। मैं फिर खोने लगी।
“ओके, अब नॉर्मल हो जाओ... बस देखो” वो मेरे पास बैठी और वीडियो दिखाया।
“हाय भगवान, हम वैसा ही कर रहे थे, और तुम बेशर्म हो, देखो ये क्या कर रहे हो... प्लीज मैम, इसे मेरे फोन में भी ट्रांसफर कर दो!”
“ओके, कोई बात नहीं” उन्होंने मेरे मोबाइल में कॉपी कर दिया।
“ओके, जारी रखो... सॉरी डिस्टर्ब करने के लिए, एंजॉय लव बर्ड्स!” कहकर दोनों चली गईं। अब मुझे शर्मिंदगी होने लगी कि मैंने ये क्या किया। आर्यन ने फिर मुझे खींच लिया। सामने वाला जोड़ा सेक्स एंजॉय कर रहा था। लड़की पैंट के बाहर से ही लड़के का लंड मसा रही थी, लड़का शर्ट में हाथ डालकर चुचियां दबा रहा था। आर्यन ने भी लिपटकर मेरी चूत दबा दी। मैं उछल पड़ी।
“आर्यन, ये मत करो, अच्छा नहीं लगता!”
“सॉरी रिया, मुझसे बर्दाश्त न हुआ, देखो इसका क्या हाल है!” उसने अपने लंड की ओर इशारा किया। मैंने फुर्सत पाकर तुरंत उसका लंड पकड़ा और मसलकर अंदर दबा दिया।
“इसे काबू में रखो, समझे!” लेकिन उसके लंड का आकार और मोटाई का एहसास होते ही मेरा बदन कांप गया। आर्यन के मुंह से कराह निकल गई। मैं खड़ी हो गई। सामने वाले जोड़े की नजर पड़ी तो वो अलग हो गए। मैं मुस्कुराई और उनके पास गई।
“हाय, मजा आ रहा न?” लड़की शरमाई, मुझे भी खूब मजा आया। कल भी आओगे न... हम भी आएंगे” लड़का-लड़की दोनों हंस पड़े।
“तुमने तो जबरदस्त एंजॉय किया, हमने सब देखा। तुम्हारा जोड़ा कमाल का है, थैंक्स फ्रेंड्स”
रात को कमरे में अकेले लेटे-लेटे आर्यन का चुम्बन, बूब्स मसलना और चूत दबाना बार-बार याद आने लगा। उसके लंड का स्पर्श जान ले रहा था। मैंने मोबाइल पर वीडियो देखा। मेरी चूत गीली हो गई। बर्दाश्त न हुआ तो मैंने उसे फोन किया।
“आर्यन, क्या कर रहे हो?”
“पढ़ाई कर रहा हूं, और क्या?”
“मेरे पास आ जाओ, तुम्हारी याद सता रही है!”
“अभी आऊं? कोई क्या कहेगा, रात आठ बजे लड़का आया!”
“आ ना, यहां कोई नहीं, पड़ोस के घर में अंधेरा है।”
“ठीक है, आता हूं” फोन कट गया। मैं बेचैन होकर इंतजार करने लगी।
जल्द ही आर्यन आ गया। मैं दरवाजे पर ही खड़ी थी।
आते ही बोला, “क्या हुआ, सब ठीक है न?”
“नहीं, कुछ ठीक नहीं।”
“क्या बात है, ऐसा क्यों बोल रही हो?”
“पहले अंदर आओ, फिर बताऊंगी।”
अंदर आते ही मैंने दरवाजा बंद किया और राहत की सांस ली। उसके आते ही बेचैनी दूर हो गई और बोलने वाली बात भूल गई।
“अब बोलो न...”
“बस तुम आ गए, सब भूल गई।” मैं शरमाकर कबूल किया। “रिया तुम भी न...” वो बिस्तर पर बैठा। “अब मेरे पास आओ न”
“बولو, आ गई।” मुझे पता था वो चूमेगा, छुएगा, मजे करेगा।
“तुमने बुलाया और अब चुप, मन डगमगा तो नहीं रहा?” आर्यन ने हाथ पकड़कर खींचा। मैं फिर शरमाई।
उसने मुझे गोदी में बिठाया और कमर पर हाथ फेरा। मेरा चेहरा उसके चेहरे के पास आ गया। होंठ कांपे। मेरे होंठ खुल गए और निचला लब उसके होंठों में दबा। वो निचला होंठ चूसने लगा। उसका हाथ मेरे बूब्स पर आया। छोटे उरोज उसके हाथों में मसले गए। मुंह से सिसकी निकली।
“रिया, ब्रा नहीं पहनी” उसके हाथ नंगे बूब्स पर फिसल रहे थे। मैंने उसके लब दबाकर चुप कराया। उसके लंड में उछाल आ रहा था। मेरा हाथ धीरे उसके लंड पर गया और साइज नापने लगा।
“सॉरी रिया, तुम्हारा रूप सहन नहीं हो रहा, ये तप रहा है।” मैंने फिर अंगुली उसके होंठ पर रखी।
“आर्यन, ज्यादा बोलते हो, चुप रहो। जो होगा सो होगा।” मेरा बदन वासना से लबालब था। कुमारी चूत खिलने को बेचैन। लंड डंक मारने को आतुर। उसने चूत की ओर हाथ बढ़ाया तो मैंने टांगें फैला लीं। उसका हाथ चूत पर था।
“पैंटी भी नहीं पहनी।”
“आह्ह्ह आर्यन, मत बोलो न, जानते हो तो क्यों कहते हो?” मैंने नाराजगी दिखाई। अब मैं उसके हाथों की कठपुतली बनी थी। वो मेरे अंगों को मनमाने ढंग से मसा रहा था। मजा आ रहा था।
“आर्यन, जींस ढीली करो न, कब तक छुपाओगे इसे”
“चल हट, बिगड़ेगा तो नाराज मत होना।” आर्यन ने शरारत की। जींस उतार दी।
“अंडरवियर भी उतारूं?” बिना इंतजार के पूरी तरह नंगा हो गया। मैं उसके बदन को निहारती रही। चिकना, सुंदर, गोरा, बिना बाल... हाय, पसीना छूट गया। देखकर वासना भड़क उठी। मैंने बाकी कपड़े उतार फेंके और नंगी हो गई। लिपट गई। नंगे बदन रगड़ खाने लगे। नंगापन महसूस होने लगा। मैंने लंड पकड़ लिया...
“हाय आर्यन, इतना मोटा लंड, इतना लंबा लंड, इसे मेरी चूत में समा दो।” नशे में डूबी बोल दी। उसके हाथ मेरी गांड की गोलाइयों को मसल रहे थे। मैं लंड को चूत से रगड़ रही थी। सुपाड़ा चमड़ी से ढका था। चूत का रस लंड को भिगो रहा था।
आर्यन मुझे दबोचकर बिस्तर पर लेटा और ऊपर चढ़ गया। शरीर में वासना की मीठी जलन फैलने लगी। चूत फड़फड़ाई। उसने लंड का पूरा दबाव चूत पर लगाया। लेकिन फिसल जाता। मैंने लंड पकड़कर चूत में डाला। घुसते ही चीख निकल गई। लंड कच्चा था, पहली बार चूत चखी। सुपाड़े की रिंग फट गई।
“क्या हुआ आर्यन, चूत से डर गए?” मैं चीख न समझ सकी।
“चुप हो जाओ, लगता है कुछ हो गया।"
“कुछ नहीं, लगाओ न, पूरा अंदर ठोक दो, प्लीज!” उसने बेचैनी देखी और बाहर निकालकर जोर से पूरा धक्का मारा। इस बार मेरी भी चीख निकली। आर्यन रुक गया।
“अब तुम्हें क्या?” चूत से खून बहा। लेकिन उसकी नजर चेहरे पर, जहां आंसू बह रहे थे।
“रो क्यों रही हो, मुझे तो दर्द हुआ, तुम क्यों?”
“मेरी झिल्ली फट गई, हाय!” मैं रो पड़ी। झिल्ली के बारे में जानती थी लेकिन फटने का अहसास पहली बार।
“अरे चूत की झिल्ली फटी है, गांड की नहीं, बस अब उतरो!” दोनों को दर्द हो रहा था।
लंड निकाला तो खून बहा। मैंने कपड़ा लगाया। खून देख आर्यन घबरा गया। मैंने समझाया तो शांत हुआ।
अब चुदाई का जोश ठंडा पड़ गया। हम बाथरूम में सफाई करने गए। उसके लंड पर सुपाड़े की स्किन फटी, लालिमा थी। मैंने पैड लगा लिया।
“आर्यन कितना मजा आ रहा था, ये क्या हो गया... डर लग रहा है।”
“लगता है सजा मिली...” वो जाने को तैयार था।
कुंवारापन जाता रहा, अब हम मर्द-औरत बन चुके। चुदाई को तैयार। आर्यन चला गया। मैं लेटी रही। दर्द किससे कहें। चूत में टीस। रात भर जागी, नींद आ गई पता न चला। दूसरे दिन दर्द गया। वासना फिर जागी।
सुबह आर्यन का फोन न आया। मेरा किया तो बंद। कॉलेज में न दिखा। परेशान हो गई। शाम को विक्रम आया, परेशानी देख पूछा। बताया आर्यन बात न कर रहा। तसल्ली दी, शायद बाहर है, इंतजार करो।
विक्रम अब रोज मन बहलाता। मजाक, हंसी, सेक्सी जोक्स। धीरे-धीरे विक्रम की ओर खिंची। आर्यन याद आता, विक्रम भुला देता।
एक शाम संयम टूटा, विक्रम से चुद गई। कॉलेज से लौट बिस्तर पर लेटी सोच रही थी। अचानक विक्रम सेक्सी लगा। नंगे बदन की कल्पना। चुदने का ख्याल। उसकी हर बात भानी लगी। हंसी, स्टाइल। वासना जागी। लगा विक्रम से संतुष्टि मिलेगी।
विक्रम शाम को आया, पसंदीदा आइसक्रीम दी। हमेशा का रूटीन। लेकिन नजरें बदलीं। आते ही सेक्सी जोक सунाया। आइसक्रीम पिघलकर छाती पर गिरी।
“हाय विक्रम, कुर्ता गंदा!” विक्रम ने गीला कपड़ा लिया, छाती पर घिसा। दाग गया लेकिन दबे बूब ने आग लगाई। गुदगुदी हुई, आह निकली।
“मजा आया न?” शरारत की।
“मारना चाहिए तुझे!” नाराजगी जताई।
“मारना है तो पूरा, दाग साफ करूं?” फिर जोक।
“विक्रम, पहले दबाया अब मजाक!”
“अरे रिया, दबा ले न, चमड़ी ही तो दबेगी, मुझे मजा आएगा।”
“देख पिटेगा!”
“पिटना है तो दबाकर!” फिर शरारत।
विक्रम ने बूब्स दबाए। वासना में क्या कहूं। मन में भी यही था। हाथ हटाने की कोशिश, लेकिन मजा आ रहा तो होने दिया।
“छोटे लेकिन सख्त, हाय रिया, कुछ बिगड़ा नहीं न, मजा आया?” सांसें तेज।
“हाय, अब मत करो वरना बिगड़ जाएगा!” धड़कन तेज। विक्रम जानता था शुरू करूं तो मना न करोगी।
“चमड़ी का खेल है, बस रगड़ना है।”
“विक्रम खराब हो, जिस्म को चमड़ी कह रहे। ला तेरी चमड़ी मसलूं” जवाब दिया। उसका लंड जोर मार रहा। बिना इंतजार उसके लंड को पैंट पर से भींचा। आह निकली। वो लिपटा चूमने लगा। हाथ स्कर्ट में, नंगा बदन उसके कब्जे में। निप्पल मसला।
“हाय विक्रम बस, बिगड़ जाएगा।” बदन पिघल रहा। खुशी की लहरें।
“चमड़ी को कुछ न होगा, वैसी रहेगी।” हंसी-वासना का खेल भा रहा।
“विक्रम मत बोलो, छूने से मस्ती हो रही।” हंसी और रंग चढ़ा। लगा बस दबाता रहे।
“साली मस्ती बढ़ रही, चल चमड़ी रगड़ें।”
“और हंसाओगे!” हंसी न रुकी। स्कर्ट उतारा, ऊपरी बदन नंगा।
“गोरी चिकनी चमड़ी, क्या शेप, कमाल का फिगर!” फिर हंसी।
“चमड़ी का पीछा न छोड़ोगे, अपनी दिखाओ, कपड़े उतारो!”
मौका मिला, झट नंगा। पहलवान पोज।
“देखो सॉलिड बॉडी, मच्छर पहलवान हूं न?”
“हाय विक्रम!” खिलखिलाई, “पेट दुख रहा।”
“पसंद न आई?”
“ऐसे खड़े रहो, सब सुंदर है।” खड़ा लंड सुंदर लगा। हाथ लगाया।
“नरम चमड़ी का कड़ा लंड... देखो कितना मस्त।”
“अब तेरी नरम चमड़ी वाली चूत की बारी।” हंसाते बिस्तर पर लिटाया। लंड चूत पर दबा। मन किया चोद दे।
“बोलो रिया, जय ऊपर वाले की!”
“बस करो, जय ऊपर वाले... बस” उसी पल लंड चूत में उतरा। चूत ने निगला। मीठी गुदगुदी।
हैरानी, कोई दर्द न, सिर्फ मजा। सोचा दर्द-मजा अंदर ही। कल दर्द, आज स्वर्ग। किसी की जरूरत न, सॉलिड लंड और भरोसेमंद मर्द चाहिए। खुद लूटो। उसके धक्के बढ़े, मस्त हुई।
“फूल खिल चुका, किसी ने चोदा या खेल में?” इशारा समझा, मजा लंड में।
“खिले फूल में मजा, भरपूर मिलेगा।” लंड समाते बोली।
“चमड़ी रगड़ने में मजा, यही खेल है डार्लिंग” धक्के देते। चूत पानी-पानी। चरम पर। बदन ऐंठा। चूत पानी छोड़ेगी। लपलपाई। नसें तनीं। होश खोया। चूत कसी, पानी छोड़ा।
“आह्ह विक्रम, निकल गई, पानी आ रहा।” शरीर झड़ा। स्वर्गीय सुख। पानी निकला। लेकिन धक्के न रुके। पूरा पानी निकलते उल्टा किया। गांड फैलाई। लंड गांड छेद पर। गुदगुदी। अगले पल चीख। लंड गांड में।
“विक्रम निकालो, मर जाऊंगी!”
“चमड़ी है, फैल जाएगी, शांत।” दूसरा धक्का। जलन। न रुका। मुंह बंद। जोर से गांड चोदी। छेद नरम, पहली बार लंड।
धक्कों के बाद लंड ने माल छोड़ा। गांड भर दी। वीर्य ने मरहम किया। चिकनापन। लंड बाहर। वो कराहा। लंड छिल गया, चमड़ी फटी। गांड जल रही।
बाथरूम में सफाई। हल्की सूजन। विक्रम ने बोरोज प्लस लगाया।
“रिया रुको, अभी आया।” लेटी चुदाई सोची। हंसी आई।
“क्यों हंस रही?” रात का खाना लाया।
“हंसी क्यों न आए, चमड़ी खेल में सारी फट गई।” खिलखिलाई।
“हा, लंड की मां चुद गई।” अंगुली होंठ पर।
“गाली न दो...” फिर हंसे। शरमाया, सॉरी।
“आर्यन के बारे में कल पता करूंगा।” दिलासा। लेकिन अब आर्यन किसे?
“रहने दो, अब तुम ही प्यारे लगते हो।”
“नहीं, एक लंड और चाहिए... शायद ज्यादा...” हंस पड़ा। मन की बात?
“तुझे चूत न चाहिए? पटाऊं किसी को?”
गहरी नजरें, फिर ठहाके। जवानी का तकाजा समझ गए।
Kahani padhne ke baad apne vichar comments mein zaroor likhein – Amit Sharma