भाइयों सुनो एक सच्ची बात! मेरी चाची रीता के साथ इस यौन संबंध का रहस्य सुनो। यह सपना तब प्रारंभ जब चाची चाचा रामेश्वर से विवाह कर हमारे जयपुर घर आईं। चाचा सुस्त स्वभाव दुबले-पतले, नपुंसक प्रतीत।
विवाह काल सामान्य किंतु एक दिन चाची वस्त्र परिवर्तन दृष्टि पागलता। चाची तब उनतीस वर्षीय, मैं अठारह। लंड नव जागृत। ब्रा-पैंटी दृष्टौ लंड विक्षिप्त। योनि दर्शन इच्छा।
कुछ दिवस सामान्य, फिर चाची एकाकी कक्ष मैं जासूसी हेतु।
दृष्टौ नग्न शयन बैंगन योनि प्रविष्ट। लौड़ा तनित। नेत्र निमीलित चोदन स्वप्न।
तब चाची ध्वनि- अजय बाहर क्यों? अंदर आओ!
भय- कैसे देखा?
प्रविष्ट तो गाउन धारण। उफ्फ गाउन में बम्पर! सलोना देह! विशाल दूध! चौड़ी गांड गोल जांघें! यौवन टपकता! दीवाना।
चाची- क्या ताकते हो बाहर?
मैं- कुछ नहीं चाची! यूं ही।
वह- खड़े हो तो यह हथियार क्यों तना?
सकपकाया हिम्मत- कौन हथियार?
चाची- लंड!
मैं- नहीं चाची!
चाची- बता जल्दी! नहि सबको कहूंगी इज्जत लूटने को!
घबराहट- नंगा देखा, सुंदर! चुदवाओगी?
चाची- हां राजा! कबसे चाहती कोई लंड फंसे प्यास बुझे! चाचा थकेले, चुम्बन दूध दाब चूत चाट न, लंड चूस न, गंदी बात न! दो माह दो बार, दो मिनट हिल सो! तू हट्टा-कट्टा कुत्तिया चुदूंगी!
क्यों नहीं रानी! तृप्त करूंगा, सड़क पर भी चुदवाएगी! माल प्यासा? अब गांड सराबोर! चाचा कल बाहर, तेरा कक्ष अलग, रात्रि आऊंगी, सेक्स आतंक!
चाची- शानदार! आधा दारू बटर चिकन ला! दारू मूड! सिगरेट भूलना मत! तीन माह दारू न! सीधा पति चूत न देखे! आज थोड़ा सेक्स! लंड चाखूंगी!
धीरे चाची दूध सहला, मैं लंड मसला! गाउन त्यक्त बटले चुक्षमाण! आवाजें- हाय! उफ अजय! मसल! फोड़ दे! झटके से लौड़ा मुख!
जन्नत! खींच चुक्षमाण! फुद्दी सहला! आह मजा! सुपाड़ा चुक्षमाण!
फिर- गांडू बुर चाट!
झुका दर्शन! गुलाबी टाइट न! चुद चुकी।
पूछा रंडी! चाची पूर्व कितनों से?
बोली- छह माह बॉयफ्रेंड चोदा! जीजू सील तोड़े! अय्याश! दीदी अलग चोदते! अगली बार उनके कानपुर, ग्रुप- दीदी जीजू भाई भाभी बहन बहनोई!
चूत चाटन! लौड़ा प्रविष्ट धक्के! मस्ता- आह राजा! कुत्ते चोदो! फाड़ बुर!
दस मिनट चोदा झड़ा!
चाची तृप्त- कल चार-पांच बार छिनाल बुर पानी छोड़े!
बाहर आया!
Kahani padhne ke baad apne vichar comments mein zaroor likhein – Sanjay Patel